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Sonebhadra News: बाॅर्डर पर मजबूत नेटवर्क से गांजे का प्रवेश द्वार बन गया है सोनभद्र

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सोनभद्र। बलिया की तरह ही सोनभद्र की अंतरराज्यीय सीमाओं पर तस्करों का मजबूत नेटवर्क है। कहीं वह फर्जी परमिट के सहारे रेत का परिवहन कर रहे हैं तो कहीं गांजा-शराब की अवैध खेप ओडिशा से छत्तीसगढ़ के रास्ते यूपी ला रहे हैं। बिहार और झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्र में पशु तस्करों का लंबा रैकेट है। इस खेल को संरक्षण देने में पुलिस की संलिप्तता भी सामने आ चुकी है। अवैध वसूली में लिप्त रहने के कारण ही पिछले दो साल में 15 पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं। एक थानेदार सहित छह पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया जा चुका है। बावजूद रात के अंधेरे में गोरखधंधे पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है।
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चार राज्यों की सीमा पर स्थित सोनभद्र तस्करी के लिए हमेशा मुफीद रहा है। जंगल-पहाड़ों के रास्ते तस्कर पशुओं को बिहार और झारखंड पहुंचाते हैं। रॉबर्ट्सगंज की सुकृत पुलिस चौकी के अलावा पन्नूगंज, रायपुर, मांची, रामपुर बरकोनिया, कोन और विंढमगंज थाना क्षेत्र पशु तस्करी का जोन है। इसी तरह छत्तीसगढ़ सीमा पर बभनी थाने के रास्ते ओडिशा से गांजा यूपी में लाया जाता है। पिछले साल ही एसटीएफ की टीम ने चोपन और रॉबर्ट्सगंज क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों से गांजे की बड़ी खेप पकड़ी थी। कुछ दिन पहले ही रॉबर्ट्सगंज थाना क्षेत्र से ही गांजा बरामद हुआ था। इतनी मात्रा में गांजा के बभनी के बाद म्योरपुर, पिपरी, हाथीनाला और चोपन थाना क्षेत्र की सीमा को पार करते हुए अवैध गांजा अक्सर जिला मुख्यालय तक पहुंचने के पीछे तस्करों क मजबूत नेटवर्क को ही कारण माना जा रहा है।
एडीजी के निर्देश पर जांच में पकड़ी गई थी कोयला चोरीयूपी-एमपी की सीमा पर प्रवाहित सोन नदी में बालू का खनन होता है। इसी क्षेत्र में गिट्टी की निकासी होती है। एमपी से जारी परमिट पर गिट्टी-बालू के परिवहन के कई मामले सामने आ चुके हैं। पिछले साल फर्जी प्रपत्रों पर कोयला की चोरी का मामला उजागर हुआ था। एडीजी के निर्देश पर पुलिस की अलग-अलग टीम ने जांच के दौरान चाेरी का कोयला ले जाते 22 ट्रकों को पिछले साल पकड़ा था। फर्जी प्रपत्रों के जरिए यह कोयला चंदासी मंडी पहुंचाया जा रहा है, जबकि उन्हें मप्र के पावर प्लांटों में पहुंचाना था।
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बॉर्डर पर तेल और शराब की तस्करी का खेल
शक्तिनगर। बाॅर्डर पर तेल व शराब की तस्करी का खेल लंबे वक्त से चल रहा है। इस मामले में आपूर्ति व आबकारी महकमे के कंधे पर सड़क पर निगाह रखने वाले जिम्मेदार अच्छे से खेल रहे हैं। बलिया में तस्करी के मामले में हुई बड़ी सर्जरी के बाद यूपी-एमपी के बाॅर्डर पर हो रहा कारोबार चर्चा में है।
यूपी में मध्यप्रदेश के अपेक्षाकृत डीजल करीब चार रुपये सस्ता है। इसी अंतर को भुनाने के लिए कारोबारियों ने सिंडिकेट खड़ा किया है। इस तस्करी पर कार्रवाई तो हुई लेकिन इसे नाकाफी माना जा है। दूसरी तरफ व्यवस्था में सेंधमारी कर रिटेल (पंप से मिलने वाले डीजल) को मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में खनन संबंधी कार्य कर रही आउटसोर्सिंग कंपनियों में खपाया जा रहा है।
आउटसोर्सिंग कंपनियों के उपयोग का डीजल कंज्यूमर श्रेणी में आता है। नियम अनुसार इसे तेल डिपो से उठाने की व्यवस्था है लेकिन कंज्यूमर श्रेणी का डीजल महंगा होने के चलते यूपी क्षेत्र में स्थित पंपों का डीजल बड़े पैमाने पर मध्यप्रदेश में खप रहा है। पुलिस आपूर्ति महकमे को जिम्मेदार ठहरा कर कार्रवाई से बचती है इसके वजह से धंधा फल फूल रहा है। इसी प्रकार अंग्रेजी शराब की कीमतों में अंतर का लाभ उठाने के लिए धंधेबाज सक्रिय हैं। यूपी में शराब सस्ती है जबकि पड़ोसी मध्यप्रदेश में महंगी। इस मामले में आबकारी विभाग की भूमिका को जिम्मेदार ठहराया जाता है। कुछ मामलों में संज्ञान लिया गया कि यूपी का सस्ता तेल मध्यप्रदेश तक पहुंचाने के लिए यूपी क्षेत्र में स्थित कोयला खदानों के रास्तों का उपयोग किया जाता है। दोनों प्रदेशों के सीमांचल क्षेत्र में स्थित कोयला खदानें आपस में आंतरिक मार्गों से जुड़ी हैं।
सभी थाना प्रभारियों और पुलिसकर्मियों विशेष बाॅर्डर के थाने वालों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी तरह का अनैतिक कार्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी सीओ और एएसपी को निर्देशित किया गया है कि अपने क्षेत्रों में दिन-रात आकस्मिक चेकिंग कर यह सुनिश्चित करें कि कोई पुलिसकर्मी भ्रष्टाचार में संलिप्त नहीं है। -डॉ. यशवीर सिंह, एसपी।
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