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यूपी: सर्विस बुक में आदिवासी पिता का नाम, बच्चों के आधार में मुस्लिम पहचान शामिल; जांच के घेरे में मामला

Tue, 29 Sep 2026 05:56 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।

सार

सोनभद्र जिले में आदिवासी युवती हीर कुंवर के नाम जमीन की रजिस्ट्री पर जांच की मांग की गई है। मामले में एसडीएम ने आश्वासन दिया। हीर कुंवर के बच्चों के आधार कार्ड में उनका नाम मुस्लिम पहचान के साथ दर्ज है। 
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जमीन की रजिस्ट्री पर उठे सवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मुस्लिम व्यक्ति से शादी रचाने के बाद भी आदिवासी पहचान को कायम रखते हुए किरबिल में आदिवासी समाज की जमीन खरीदने वाली महिला हीर कुंवर ने अपनी सर्विस बुक में पिता का ही नाम रखा है। बच्चों के आधार कार्ड में उनका नाम मुस्लिम पहचान के साथ दर्ज है। महिला ने दावा किया है कि पति के निधन के बाद आदिवासी परंपरा का पालन करते हुए उसने दोबारा शादी नहीं की है। आदिवासी संस्कृति के साथ जीवन यापन कर रही है।

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क्या है पूरा मामला
चांगा निवासी हीर कुंवर भदोही पुलिस लाइन की इंटेलिजेंस शाखा में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं। उनके दो बच्चे हैं। बता दें कि म्योरपुर थाना क्षेत्र के चांगा गांव की हीर कुंवर पत्नी इस्माइल खां के नाम किरबिल में जमीन के बैनामे को लेकर विक्रेता रामकिशुन पनिका के परिवार वालों ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने जमीन के बंटवारे और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।

मृतक रामकिशुन के बड़े भाई शिवनाथ पनिका की पत्नी सुंदरी और बहू बसंती का आरोप है कि दोनों भाइयों के बीच बंटवारे के बाद सड़क के सामने की जमीन का हिस्सा हीर कुंवर के नाम गलत तरीके से बैनामा कर दिया गया। यह जमीन कीमती है, मगर सस्ते दामों में इसे खरीदा गया है। उनका कहना है कि हीर कुंवर ने मुस्लिम धर्म के व्यक्ति से विवाह किया है। बावजूद अनुसूचित जनजाति के दर्जे के साथ जमीन की रजिस्ट्री कराई है। 

रजिस्ट्री प्रक्रिया में भी अनियमितता का दावा करते हुए बसंती का आरोप है कि उनके ससुर को जबरन घघरी ले जाया गया और वहीं से दो गवाह तैयार कर करीब दो वर्ष पहले बैनामा कराया गया। परिजनों ने बैनामे में दर्ज गवाहों के दूसरे स्थान का होने पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर रजिस्ट्री की वैधता का सत्यापन कराने की मांग की है। एसडीएम दुद्धी अशोक गुप्ता ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आया है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।

व्यवसाय के उद्देश्य से खरीदी गई थी जमीन
हीर कुंवर ने बताया कि उनकी सर्विस बुक में आज भी पिता का नाम दर्ज है, जबकि बच्चों के आधार कार्ड में पिता के रूप में इस्माइल खान का नाम दर्ज है। उन्होंने बताया कि किरबिल में उनके नाम से जमीन खरीदी गई है, जिस पर वर्तमान में खेती-बाड़ी की जाती है। उनका कहना है कि जमीन सड़क किराने होने से व्यवसाय के उद्देश्य से खरीदी गई थी।
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एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर चर्चा में आई थी हीर कुंवर
बताया जाता है कि करीब 20 वर्ष पहले हीर कुंवर वनवासी सेवा आश्रम के माध्यम से फ्रांस के पेरिस में एक संस्था की ओर से आयोजित एथलेटिक्स प्रतियोगिता में शामिल होने गई थीं। आदिवासी छात्रा के विदेश में प्रतियोगिता में भाग लेने को लेकर उस समय वह क्षेत्र में चर्चा में रही थीं। इसके बाद उन्हें शिक्षामित्र की नौकरी मिली और वह गांव में ही कार्य करने लगीं। उनका पहला विवाह रन्नू गांव में हुआ था। पति की मृत्यु के बाद वह अकेली रह गईं। वर्ष 2011 में पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पद पर उनका चयन हुआ। बताया जाता है कि इसी दौरान चांगा गांव में क्लीनिक चलाने वाले इस्माइल खान से उनका संपर्क हुआ और बाद में दोनों ने विवाह कर लिया।
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