जिले के करीब दस अस्पतालों में मरीजों को पूरे सप्ताह ओपीडी की सेवा नहीं मिल पा रही है। उनका इलाज रोस्टर व्यवस्था के भरोसे है। ऐसे में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अति पिछड़े जिले के सरकारी अस्पतालों में एलोपैथिक चिकित्सकों के 45 फीसदी पद खाली हैं। इसका असर अस्पतालों पर सीधे तौर पर देखा जा रहा है। जिले में करीब दस ऐसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं जहां सप्ताह भर में कुछ चुनिंदा दिनों में ही ओपीडी की सुविधा मिलती है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मऊ कला और मुर्तियां पर तैनात एलोपैथिक चिकित्सक पीजी के लिए गए हैं, जिससे यहां ओपीडी की सेवाएं प्रभावित हैं। हालांकि इनके स्थान पर आयुर्वेदिक चिकित्सक की मदद लेने की तैयारी है।
दूसरी ओर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुड़ारी में चिकित्सक तैनात नहीं हैं। ऐसे में यहां ओपीडी प्रभावित है। सप्ताह में तीन दिन गुरमुरा पीएचसी के चिकित्सक की यहां ड्यूटी लगाई जाती है। ऐसे में गुरमुरा में भी लोगों को तीन दिन ओपीडी मिलती है।
दूसरी ओर सलखन पीएचसी पर तैनात चिकित्सक भी यहां महज दो दिन रविवार और सप्ताह में एक अन्य दिनों में ड्यूटी करते हैं। जबकि तीन दिनों में अन्य स्थानों पर ड्यूटी होती है, जबकि खलियारी पीएचसी पर तैनात डॉ. अमित कुमार यहां महज रविवार को ही ओपीडी की सुविधा मिलती है, जबकि अन्य दिनों में चिकित्सक अस्पताल नहीं आते हैं।
कई अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी हैं। जहां ओपीडी संचालन में दिक्कतें आ रही हैं। मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। डॉक्टरों की कमी के चलते व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं। कई स्थानों पर नियुक्ति चिकित्सक भी अक्सर गायब रहते हैं।
जहां अस्पताल में चिकित्सक नहीं हैं या फिर पीजी के लिए गए हैं, वहां आसपास के अस्पतालों के चिकित्सकों से तीन दिन ओपीडी संचालित कराई जाती है। चिकित्सकों की तैनाती को लेकर पत्राचार किया जाता है।
-डॉ.अश्वनी कुमार, सीएमओ।