सोनभद्र। नगर के न्यू कॉलोनी स्थित एक लॉन में शनिवार को गोंडवाना संस्कृति कल्चर बचाओ कार्यक्रम पर महासम्मेलन हुआ। कार्यक्रम मे प्रमुख रूप से आदिवासी समाज की खोई हुई संस्कृति को पुन: जिन्दा रखने के लिये विशेष तौर पर चर्चा कि गई। मुख्य अतिथि महाराष्ट्र से आए शीतल सिंह मरकाम व विशिष्ट अतिथि गुलजार सिंह मरकाम, हंसराज धर्ने (क्दौली), महेन्द्र गोंड (भदोही), विजयलाल मरकाम, रामजी गोंड चंदौली उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि शीतल सिंह मरकाम ने कहा कि आदिवासी समाज के लोग राजा हुआ करते थे। उनके राज मे सोने का सिक्का चला करता था, जब हम सब गोड़वाना समाज के लोग अपनी अपने धर्म और संस्कृति को मानते थे। आज हम सब अपने कल्चर और संस्कृति को भूल गए। जबसे प्रकृति पुजक से हम लोग मूर्ति पुजक हुए। आज सारी रियासत समाप्त हो गई। कोया पुनेम सोनभद्र के पथ प्रदर्शक कमलेश कुमार गोंड ने कहा कि जब तक पुन: हमारा आदिवासी समाज अपनी संस्कृति और कल्चर को नहीं मानेगा तब तक समाज का विकास नहीं होगा। त्रिपुरारी गोंड ने कहा कि आज हमारा समाज शिक्षा से वंचित है, जब तक समाज शिक्षित नहीं होगा। तब तक आदिवासी समाज का विकास संभव नहीं है। आदिवासी समाज के लोगों का जल, जंगल, जमीन पर पूरा अधिकार होता था, मगर सरकार आदिवासियों को इससे बेदखल करना चाहती है। महासम्मेलन में प्रमुख रूप से गुलाब प्रसाद गोंड, जयश्री गोंड, राजेश गोंड़, विजय लाल मरकाम, महेन्द्र गोंड, नीतू गोंड, उर्मिला, शम्भू सिंह गोंड, जोखू खरवार, विमलेश गोंड आदि रहे।