दुद्धी। क्रय विक्रय सहकारी समिति की ग्यारह सदस्यीय प्रबंध कमेटी सदस्यों की चुनावी प्रक्रिया के दौरान जमकर हंगामा हुआ। सपा और भाजपा के समर्थक आमने-सामने आ गए। काफी देर तक गहमागहमी बनी रही। बाद में प्रशासन ने विवाद को देखते हुए चुनाव प्रक्रिया को स्थगित कर दिया।
क्रय विक्रय से जुड़े 11 सदस्यीय संचालक मंडल के चुनाव के लिए 3 अप्रैल से निर्वाचन प्रक्रिया चालू है। 12 अप्रैल को मतदान होना था, जिसके लिए शनिवार को नामांकन दाखिल करने की तिथि नियत थी। निर्धारित समय से शुरू हुई प्रक्रिया के दौरान एक फार्म की बिक्री हुई ही थी कि भाजपा से जुड़े प्रत्याशी एवं समर्थक महुली लैंपस से चुने हुए प्रतिनिधियों के नाम में हेराफेरी का आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गये। उधर, सपा समर्थित प्रत्याशी एवं समर्थकों ने भी चुनाव में जबरनव्यवधान उत्पन्न करने का आरोप लगाते हुए धरना शुरू कर दिया। दोनों तरफ से तरह-तरह के आरोप प्रत्यारोप के साथ नारेबाजी होती रही। तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी मात्रा में पुलिस व पीएसी फोर्स लगा दी गई। सूचना पर सीओ दद्दन प्रसाद गोंड व तहसीलदार ब्रजेश कुमार वर्मा के साथ पहुंचे एसडीएम एसपी सिंह ने निर्वाचन अधिकारी ओमप्रकाश जैसवार से सारी जानकारी ली। इसके बाद दोनों पक्ष के लोगों को बैठाकर बातचीत से हल निकालने की कोशिश की, मगर नतीजा सिफर रहा। दोनों पक्ष अपनी मांगों पर अड़े रहे। भाजपा प्रत्याशी चाहते थे कि आज की चुनावी प्रक्रिया स्थगित कर, गलत तरिके से सपा समर्थित प्रत्याशी का नाम भेजने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हो। वहीं सपा प्रत्याशी चाहते थे कि चुनावी प्रक्रिया चालू रहे। इसको लेकर साढ़े दस बजे से सायं 4 बजे तक दोनों पक्ष धरना पर बैठे रहे और निर्वाचन प्रक्रिया का समय समाप्त हो गया। इस बीच करीब सवा तीन बजे नामांकन के सवाल पर दोनों पक्ष फिर आमने सामने आ गए। तनातनी का माहौल देख पुलिस ने सक्रियता से दोनों पक्षों को अलग कर दिया। अंत में 4 बजे के बाद निर्वाचन अधिकारी ने दोनों पक्ष के धरना और नामांकन फार्म की बिक्री न होने आदि को आधार बनाते हुए नोटिस चस्पा कर चुनाव स्थगित करने की घोषणा कर दी।
भाजपा सरकार में लोकतंत्र की हत्या: विजय
सोनभद्र। सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष विजय यादव ने बताया कि दुद्धी डायरेक्टर चुनाव में भाजपा सरकार के दबाव में पुलिस प्रशासन के अधिकारी लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं। दुद्धी डायरेक्टर पद पर सपा प्रत्याशी की एकतरफा जीत तय थी, लेकिन अचानक से प्रत्याशियों को नामांकन पत्र ही नहीं दिया गया। अधिकारी पूरी तरह से भाजपा का एजेंट बनकर काम कर रहे हैं। सपा का एक-एक कार्यकर्ता इसकी लड़ाई लड़ने के लिए हर तरह से तत्पर है।