आम बजट से सरकारी कर्मचारी निराश हैं। कर्मचारियों ने इस बजट को निराशा जनक बताया है। उनका कहना है कि टैक्स में किसी तरह की छूट नहीं मिली है। हर तरह से अधिकतम 12 हजार रुपये तक की ही छूट मिलनी है। चिकित्सा के क्षेत्र में कुछ नया नहीं है।
जिला संयुक्त अस्पताल के चिकित्सक केके सिंह कहते हैं कि आम बजट में चिकित्सा और स्वास्थ्य के लिए कोई छूट नहीं है। गंभीर रूप से बीमारों के उपचार के लिए बजट में कोई प्राविधान नहीं किया गया है। 2025 तक तीन बीमारियों को दूर करने का लक्ष्य लचीला है। बोले कर्मचारियों को कर में सिर्फ 12 हजार रुपये तक की ही छूट मिल रही है। यह काफी कम है। कलेक्ट्रेट कर्मी प्रकाश चंद्र गिरि कहते हैं कि कर्मचारियों के कर का स्लैब तीन लाख रखा गया है जबकि इसे पांच लाख किया जाना चाहिए था। तीन लाख से पांच लाख तक पांच प्रतिशत कर और पांच लाख से उपर 20 प्रतिशत टैक्स काफी ज्यादा है। यह एक तरह से कर्मचारियों के लिए झुनझुना है। स्टाफ नर्स जे. वालर कहती हैं कि सातवें वेतन
आयोग में कम ही ऐसे कर्मचारी होंगे जिनकी सालाना आय पांच लाख रुपये से कम होगी। खासकर 16 साल से उपर नौकरी करने वालों की सालाना आय पांच लाख से ज्यादा है। उस हिसाब से 20 प्रतिशत कर बहुत अधिक है।
शिक्षा विभाग के अशोक कुमार कहते हैं कि केंद्र सरकार का यह बजट सिर्फ लोक लुभावन है। इससे किसी भी वर्ग का भला होता नहीं दिख रहा है। कर्मचारियों के साथ इस बजट में कर को लेकर सौतेला व्यवहार किया गया है।