जिले में पानी का संकट गहरा गया है। औसतन बारिश न होने के नाते हैंडपंपों ने शुरूआत गर्मी में ही पानी छोड़ दिया है। इन सबके बीच जल निगम को हैंडपंपों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। विभाग के मुताबिक जिले के 34351 हैंडपंपों की जांच में छह हजार 105 हैंडपंप खराब मिले हैं। इनमें से ढाई हजार रिबोर करने योग्य हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि गांवों में किस कदर लोग पानी के संकट से जूझ रहे हैं।
जिला जंगली और पहाड़ी क्षेत्रों से घिरा हुआ है। यहां के पहाड़ी इलाकों में गर्मी का मौसम शुरू होते ही पानी का संकट शुरू हो जाता है। इन इलाकों में रहने वाले लोग एक से दो किमी तक दूर जाकर पानी लेने के लिए विवश हो जाते हैं। लेकिन पिछले काफी अर्से से बारिश न होने के नाते मैदानी इलाकों में भी पानी का संकट खड़ा हो गया है। जलस्तर तेजी से नीचे की ओर भाग रहा है, जिस नाते हैंडपंपों ने पानी देना छोड़ दिया है। जल निगम की यूनीसेफ इकाई से हैंडपंपों की जांच के जो आंकड़े मिलेे हैं, वे यह बताने के लिए काफी है कि यहां के लोग किस हद तक पानी के संकट से जूझ रहे हैं।
विभागीय सूत्रों की मानें तो वाटर सेनिटेशन सपोर्ट आर्गनाइजेशन की इनफोटेक लिमिटेड ने जिले के 34 हजार 351 हैंडपंपों की जांच की थी। विभाग के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार का कहना है कि करीब चार माह पूर्व हुई जांच में 6105 हैंडपंप पूरी तरह से खराब निकले और करीब ढाई हजार हैंडपंप रिबोर के योग्य हैं। शेष को मरम्मत की जरूरत है। इन हैंडपंपों की मरम्मत के लिए जल निगम के पास धन नहीं है, इसलिए उनकी सूची जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय, जिला पंचायत कार्यालय को दी गई है ताकि वे अपने स्तर से विभिन्न मदों में उपलब्ध धनराशि से उनकी मरम्मत करा सके।