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Sonebhadra News: साहब, पेंशन भले बंद कर दो, लेकिन मुझे जिंदा कर दो...

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सोनभद्र। वृद्धावस्था पेंशन के लिए कराए गए सत्यापन में कई गड़बड़ियां मिली हैं। सत्यापन के दौरान ऐसे लोगों को भी मृत घोषित कर दिया गया है, जो अब भी जिंदा हैं। उनके पेंशन पर रोक लगा दी गई है। अब वह खुद को जिंदा साबित करने के लिए भटक रहे हैं। शक्तिनगर में कांता सत्यापन की इसी चूक का शिकार हुए थे। उन्हें मृत घोषित करने से पेंशन बंद हो गई थी। कुछ ऐसी ही स्थिति बभनी के दूधनाथ की भी है।
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आर्थिक रूप से अशक्त व असहाय बुजुर्गों, दिव्यांगों, महिलाओं को अलग-अलग विभागों के माध्यम से पेंशन प्रदान की जाती है। ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारियों के माध्यम से होने वाले सत्यापन में अक्सर गड़बड़ियां सामने आती रही हैं। म्योरपुर ब्लॉक के नधिरा गांव निवासी 65 वर्षीय दूधनाथ भी इसी अव्यवस्था के शिकार हैं। पेंशन की सत्यापन रिपोर्ट में उन्हें मृत बता दिया गया है, जबकि वह जिंदा हैं। इस आधार पर उनकी पेंशन भी बंद हो गई है।
उन्होंने आवेदन देकर खुद को जिंदा साबित करने की गुहार लगाई। करीब 15 दिनों से वह जिंदा साबित होने के लिए भटक रहे हैं। दूधनाथ ने बताया कि पेंशन का पैसा दवा-उपचार के काम में आता था। इसे बंद कर दिया गया। इस बाबत ग्राम पंचायत विकास अधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह का कहना था कि दूधनाथ का सत्यापन करा लिया गया है। उनसे आय प्रमाण पत्र मांगा गया है। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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दूधनाथ का प्रकरण संज्ञान में है। सत्यापन के दौरान मानवीय भूल से अपात्र की जगह मृतक के कॉलम में निशान लग गया था। जानकारी होने पर अब उसे सुधार दिया गया है। हालांकि वह पेंशन पाने के लिए पात्र नहीं है। जहां तक चिल्काडांड के कांता का सवाल है तो ब्लॉक से उनके संबंध में मृतक की रिपोर्ट आई थी। - रमाशंकर यादव, जिला समाज कल्याण अधिकारी।
चिल्काडांड के कांता का आवेदन बेलहत्थी गांव से हुआ था। गांव की खुली बैठक में इसका सत्यापन किया गया तो इस नाम से कोई व्यक्ति नहीं था। लिहाजा नाम काटने की रिपोर्ट भेजी गई थी। -हेमंत सिंह, बीडीओ म्योरपुर।
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