जनपदवासियों को पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए जल्द ही विधायक और विधान परिषद सदस्यों द्वारा सात सौ नए हैंडपंप लगाए जाएंगे और उतने का हैंडपंपों का मरम्मत कराया जाएगा। इसके लिए शासन के सचिव वी. टेकाली झिमोमी ने जिला प्रशासन से आठ मई तक प्रस्ताव मांगा हैै। विधायकों, एमएलसी द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रस्ताव को डीएम अनुमोदन कर शासन को भेजेंगे।
चिलचिलाती और प्रचंड धूप में तेजी से जलस्तर खिसक रहा है। इस नाते हैंडंपपों ने पानी उगलना बंद कर दिया है। वहीं अधिकांश नदी, नाले, तालाब और कूप सूख गए है। जिले में स्थापित करीब 35 हजार हैंडपंपों में से लगभग साढ़े 14 हजार हैंडपंपों के पानी छोड़ने से हाहाकार मच गया है। सर्वाधिक पहाड़ी व जंगली इलाकों में पेयजल का संकट गहरा गया है।
इन इलाकों के रहवासियों को कई किमी दूरी तय कर नदी, नाले और चुआड़ से पानी लाना पड़ रहा है। दूषित पानी का सेवन करने से स्वस्थ व्यक्ति भी बीमार हो रहे हैं। फिर भी पहाड़ी इलाकों में टैंकरों से पेयजलापूर्ति नहीं हो पा रही है। क्योंकि इन इलाकों में टैंकरों से के भरने की व्यवस्था नहीं है।
हालांकि सपा सरकार ने पानी संकट को गंभीरता से लेते हुए विधायक और एएमएलसी को जल्द से जल्द अपने-अपने क्षेत्र में सौ-सौ नए हैंडपंप और सौ-सौ पुराने हैंडपंपों का रिबोर कराने की अनुमति दे दी है। कुछ दिन पूर्व उत्तर प्रदेश शासन के सचिव वी. टेकाली झिमोमी ने जिला प्रशासन से आठ मई तक हरहाल में विधायकों और एएलएसी द्वारा किन-किन स्थानों पर हैंडपंप लगाए जाएंगे और किन-किन हैंडपंपों का रिबोर होगा के संबंध में प्रस्ताव मांगा है।
इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र सिंह ने बताया कि सभी जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव मांगा गया है। अभी तक घोरावल विधायक रमेश चंद्र दूबे का सिर्फ प्रस्ताव मिला है। बतादें कि जिले मेें चार विधायक और तीन एमएलसी है। ऐसे में सात सौ नए हैंडपंप और उतने ही हैंडपंपों का रिबोर होगा। हैंडपंपों के लगने से काफी हद तक पानी की समस्या दूर हो जाएगी।