विंध्याचल मंडल के आयुक्त बालकृष्ण त्रिपाठी सोमवार को दुद्धी ब्लॉक के फ्लोराइड प्रभावित गांव मनबसा पहुंचे। उन्होंने हैंडपंप के पानी की जांच कराई तो फ्लोराइड का खतरनाक स्तर देखकर चौंक गए। मंडलायुक्त ने ग्रामीणों से अपील की कि वह इस पानी को न पीएं। जल निगम के अधिकारियों को गांव में तत्काल टैंकर से पानी पहुंचाने के निर्देश दिए। इसके बाद चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। रविवार को डीएम ने फ्लोराइड प्रभावित गांव पड़रक्ष पहुंचकर जायजा लिया था।
अमर उजाला ने 28 फरवरी के अंक में फ्लोराइड पीड़ित लोगों के दर्द को उजागर किया था। एक मार्च को सपा मुखिया अखिलेश ने अमर उजाला की इस खबर को एक्स पर पोस्ट कर प्रदेश सरकार पर तंज कसा था। इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया था।
इसी क्रम में सोमवार को करमडांड़ ग्राम पंचायत के मनबसा गांव पहुंचे मंडलायुक्त ने जल जीवन मिशन के तहत जल सखी को दी गई किट से हैंडपंप के पानी की जांच कराई। इसमें फ्लोराइड की मात्रा मानक 1.5 पीपीएम से काफी अधिक थी। इस पर मंडलायुक्त ने चिंता जताई। डीएम बद्रीनाथ सिंह ने टैंकर से जलापूर्ति का निर्देश दिया। उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत बनी टंकी से भी आपूर्ति की बात कही। इस पर जल निगम के एई अजय सिंह ने बताया कि 37 में से 35 किमी तक पाइप लाइन बिछा दी गई है। बिजली की समस्या की वजह से आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
डीएम ने वैकल्पिक व्यवस्था कर जल्द पानी आपूर्ति के निर्देश दिए। उन्होंने फ्लोराइड पीड़ित विनोद, गौतम कुशवाहा और अर्जुन खरवार से उनकी समस्याओं के बारे में पूछा। पीड़ितों ने बताया कि उनके कमर और पैर में असहनीय दर्द रहता है। इससे वह न चल-फिर पाते हैं और न ही काम कर पाते हैं। मजबूरी में गांव वालों को फ्लोराइड युक्त पानी पीना पड़ता है।
सीएमओ डॉ. अश्विनी कुमार ने ग्रामीणों से कहा कि पानी उबालकर न पीएं। फ्लोराइड को सिर्फ रिमूवल किट से ही हटाया जा सकता है। पानी उबालना नुकसानदायक है। इसके बाद अफसरों ने गांव में पेयजल के लिए टैंकर से आपूर्ति के साथ ही आरओ प्लांट की भी जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान सीडीओ जागृति अवस्थी, एडीएम नमामि गंगे रोहित यादव, डीपीआरओ नमिता शरण आदि मौजूद रहे।
पड़रक्ष में पहुंचा टैंकर, लोगों ने पानी लेने से किया इन्कार
डीएम की सख्त हिदायत के बाद फ्लोराइड प्रभावित पड़रक्ष गांव में सोमवार को टैंकर से जलापूर्ति शुरू हुई। ग्राम पंचायत की ओर से पानी का टैंकर गांव में भिजवाया गया, लेकिन ग्रामीणों ने यह कहते हुए पानी लेने से इन्कार कर दिया कि उन्हें स्थायी समाधान चाहिए।
वह इतने दिनों से हैंडपंप-कुएं का पानी पीते आ रहे हैं तो कुछ दिन और पी लेंगे, लेकिन अब स्थायी समाधान चाहिए। ग्रामीणों ने गांव में पेयजल परियोजना होने के बाद भी पाइप से आपूर्ति शुरू न होने पर नाराजगी जताई। कहा कि अगर समय से पानी आपूर्ति शुरू हुई होती तो गांव के तमाम लोग बीमारी से बच जाते। टैंकर दो-चार दिन आएगा और फिर बंद हो जाएगा। इतनी बड़ी आबादी के बीच टैंकर का पानी पर्याप्त नहीं है।
ग्रामीणों के पानी लेने से इन्कार की सूचना पाकर ग्राम विकास अधिकारी दीपक सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया। बताया कि पाइप पेयजल परियोजना पर काम चल रहा है। बहुत जल्द उससे पानी मिलने लगेगा, तब टैंकर से शुद्ध पानी दिया जा रहा है, ताकि आगे कोई बीमार न पड़े। इसके बाद ग्रामीण राजी हुए।