अशोक दुबे ने कहा कि बिना समुचित जांच के सामान्य वर्ग के छात्रों पर कार्रवाई की व्यवस्था की गई है, जबकि अन्य वर्गों के मामलों में समान प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती। इससे छात्रों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 22 फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
जिला महिला सचिव आरती पांडेय ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह का विभाजन समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। यूजीसी एक्ट में सवर्ण समाज के साथ भेदभाव की प्रक्रिया अपनाई गई है। इससे समाज में आपसी तनाव बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की कि जातिगत आरक्षण समाप्त कर सभी को समान अवसर दिया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्र हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि सरकार ने यूजीसी बिल को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक रूप दिया जाएगा।