वैश्वकि महामारी कोरोना वायरस ने केवल संक्रमित करके ही लोगों को परेशान नहीं किया। तमाम व्यवस्थाएं इस कोरोना के कारण अव्यवस्थित हो गईं। रूटीन टीकाकरण पर भी इसका काफी असर पड़ा है। विभिन्न तरह की बीमारियों से बचाव के लिए शिशुओं को लगने वाला टीका भी छूट गया। जिले में 6667 शिशु ऐसे हैं जिन्हें रूटीन टीका नहीं लग सका। अब छूटे हुए शिशुओं को टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग गांव-गांव में विशेष कैंप लगाकर टीकाकरण की तैयारी में है।
नियमित टीकाकरण के लिए आशा, एएनएम की बड़ी भूमिका मानी जाती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन दिनों आशा और एएनएम की ड्यूटी दूसरे-दूसरे कामों लगा दी गई है। इस वजह वह टीकाकरण के काम में समय नहीं दे पा रही हैं। कई जगह तो आशाओं का मानदेय भी दो-तीन माह से नहीं मिलने का मामला प्रकाश में आ रहा है। विभागीय अधिकारी बताते हैं कि बच्चों के जन्म से लेकर एक वर्ष के भीतर कुल सात बार टीके लगाए जाते हैं। इससे कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है। जिले में कभी टीकाकरण बंद तो नहीं हुआ लेकिन रफ्तार थोड़ी कम जरूर हुई है। यहां कुल 88.29 फीसदी बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हुआ है। जबकि कुल 55,314 बच्चे एक वर्ष से कम के हैं। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. रामकुंवन का कहना है कि करीब 12 फीसदी बच्चे रूटीन टीकाकरण नहीं करा सके हैं। उन्हें टीका लगवाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। केंद्रों पर टीकाकरण बंद नहीं हुआ है। जिन भी लोगों को टीका लगवाना है वह लगवा सकते हैं।