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Sonebhadra News: पीएचसी बनने के 18 साल बाद भी नहीं बनी सड़क

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सोनभद्र/वैनी। ग्रामीणों को अच्छी स्वास्थ्य सेवा देने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं बन पाई है। पगडंडी से चलकर लोग अस्पताल जाते हैं। एंबुलेंस न पहुंच पाने के कारण मरीजों को कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ता है। अस्पताल में डॉक्टर और कर्मचारी भी अक्सर नहीं पहुंचते।नगवां क्षेत्र कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। नक्सल बहुल इलाकों में विकास कर लोगों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए इन इलाकों में सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य सहित अन्य सेवाओं पर खूब जोर दिया गया। इसी के तहत वर्ष 2005 में पनौरा गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनकर तैयार हुआ। इसका संचालन भी शुरू किया गया। लोगों को उम्मीद थी कि अब उन्हें बेहतर सेवाएं मिलेंगी, मगर यह आज तक सपना ही बना हुआ है। पीएचसी के निर्माण से लेकर अभी तक वहां पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है और न ही कोई व्यवस्थित रास्ता ही बना है। लोग यहां जंगली रास्ते और पगडंडी के सहारे उपचार के लिए पहुंचते हैं। पनौरा स्वास्थ्य केंद्र पर नक्सल प्रभावित पनौरा, पल्हारी, काशी, सोमां, सथारी, मझुई, सोहदाग, चिचलिक, खोडैला, बड़ैला, महुली सहित 15 से अधिक गांवों की हजारों की आबादी के उपचार की जिम्मेदारी है। स्वास्थ्य केंद्र पर जाने के लिए रास्ता न होने से कई बार गंभीर मरीज यहां न पहुंचकर निजी केंद्रों या झोलाछाप की शरण लेने को मजबूर होते हैं।
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