90 विद्यालयों के आरओ प्लांट बने शो पीस
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान से 146 परिषदीय विद्यालयों में लगे सौर ऊर्जा आधारित आरओ प्लांट में से करीब 90 विद्यालयों के आरओ प्लांट खराब है। इससे बच्चों को दूषित पानी का सेवन करना पड़ रहा है। शिक्षकों के शिकायत करने के बाद भी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी आरओ प्लांट की मरम्मत कराने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इसको लेकर अभिभावकों में नाराजगी व्याप्त है।
वर्ष 2014-15 में शासन के निर्देश पर 1810 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में अध्यनरत बच्चों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए जिला प्रशासन ने प्रथम चरण में नेडा कार्यदायी संस्था के माध्यम से 146 विद्यालयों मेें सौर ऊर्जा आधारित आरओ प्लांट स्थापित कराया। विद्यालयों में पहले से स्थापित हैंडपंपों में एक आरओ प्लांट लगाने में करीब दो लाख 60 हजार रुपये खर्च हुआ है। वर्तमान में सदर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय लोढ़ी समेत करीब 90 विद्यालयों का आरओ प्लांट खराब है।
इसके बावजूद संबंधित कार्यदायी संस्था आरओ प्लांट की मरम्मत कराने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। ऐसे में विवश होकर बच्चों को हैंडपंपों का दूषित पानी का सेवन करना पड़ रहा है। वहीं सरकार की ओर से करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए आरओ प्लांट बेकार साबित हो रहे हैं। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र सिंह का कहना है कि सभी विद्यालयों में लगा आरओ प्लांट ग्राम पंचायतों को हैंडओवर कर दिया गया है।
नेडा कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी है कि जो सोलर चैनल और सोलर पंप एक वर्ष के भीतर खराब हुए है, वे उनकी मरम्मत कराए। सेक्रेटरी और प्रधान की जिम्मेदारी है कि वे आरओ प्लांट की मरम्मत करवा कर बच्चों को पानी उपलब्ध कराएं।