रिहंद डैम का गेट खोलकर बहाया जा रहा पानी।
अक्टूबर माह में भी रह-रहकर होती बारिश के चलते एशिया के विशालतम जलाशयों में एक रिहंद डैम का कुछ दिन के अंतराल के बाद फाटक खोलने का क्रम जारी है। 16 साल में यह पहला मौका है जब रिहंद प्रबंधन को चौथी बार डैम का फाटक खोलने को विवश होना पड़ा है। वहीं स्थापना काल से अब तक अक्टूबर में पहली बार फाटक खोलने पड़े हैं। फिलहाल पिछले तीन दिन से लगातार दो से तीन गेटों को खोलकर 20 से 25 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। यह क्रम कब बंद होगा, मौजूदा हालात में संबंधित पुख्ता दावा करने की स्थिति में नहीं है।
5148 वर्गमील में फैले रिहंद डैम की शुरुआत जलधारण क्षमता 880 फीट थी लेकिन बाद के सालों में औद्योगिक अपशिष्ट के भराव के चलते यह घटकर 870 फीट आ गई। इसके चलते 2001-02 में बांध के गेट खोलकर पानी बहाना पड़ा। इसके बाद 2004, 2011 और 2016 में यह नौबत आई। ..लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है जब अक्टूबर में रिहंद डैम के गेट खोलने पड़े वह भी चौथी बार। बता दें कि इस बार सोनभद्र और सिंगरौली दोनों जिलों में हुई बारिश ने पिछले कई सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है। सात से 900 मिमी बारिश यहां औसत मानी जाती है लेकिन इस बार यह आंकड़ा दो हजार मिलीमीटर को भी पार कर चुका है।
स्थिति यह है कि जिले में चार दिन से बारिश थमी हुई है लेकिन छत्तीसगढ़ में रुक-रुक कर बारिश होने के बाद रिहंद डैम में अभी भी पानी का बढ़ाव जारी है। इसके चलते तीन दिन पूर्व से रिहंद डैम का जलस्तर 870 फीट के पार बना हुआ है, जिसके चलते बांध का फाटक खोलकर पानी बहाना पड़ रहा है। उधर, अधीक्षण अभियंता जल विद्युत शैलेष सिंह ने भी माना कि उनकी जानकारी में पहली दफा चौथी बार फाटक खोलना पड़ा है। वह भी अक्टूबर में पहली बार ऐसी नौबत आई है। आगे गेट न खोलने के सवाल पर कहा कि जब तक बारिश का क्रम पूरी तरह थम नहीं जाता, तब तक फिलहाल पुख्ता तौर पर कुछ कहना ठीक नहीं रहेगा।