मप्र और छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही बारिश से रिहंद जलाशय अधिकतम जलस्तर तक पहुंचने में महज 2.8 फीट शेष रह गया है। पिछले 24 दिनों में जलाशय में 28.7 फीट पानी बढ़ा है। यानि हर रोज एक फीट से अधिक की वृद्धि हो रही है।
यही गति रही तो अगस्त में ही बांध 870 फीट के अधिकतम जलस्तर को छू लेगा। इससे कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन जाएगी। फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर लगाए हुए है। बांध पर आधारित जल विद्युत परियोजनाओं को चालू करते हुए पानी निकाला जा रहा है।
इस वर्ष 12 जुलाई को रिहंद का जलस्तर 837.1 फीट दर्ज किया गया था, जो न्यूनतम स्तर से सिर्फ 2.1 फीट ऊपर था। अगस्त माह की शुरुआत में जलस्तर 838.5 फीट पर पहुंचा था, लेकिन इसके बाद से बढ़ाव जारी है। पिछले 24 दिनों के अंदर जलस्तर 28.7 फीट बढ़ा है।
हालांकि अभी अधिकतम क्षमता से 2.8 फीट दूर है। उम्मीद जताई जा रही है कि सितंबर माह में रिहंद का जलस्तर खतरे के निशान यानी 870 फीट को पार कर सकता है। अगर खतरे के निशान को पार कर गया तो रिहंद के फाटक खोले जा सकते हैं।
इसका सीधा असर बिहार प्रांत में बाढ़ के रूप में दिखेगा। रिहंद के फाटक खुलने पर बिहार के कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं। इसके पूर्व 2001, 2002, 2004, 2011 और 2016 में रिहंद का जलस्तर बढ़ने पर फाटक खुले थे, जिससे बिहार के कई इलाके जलमग्न हुए थे। इस वर्ष भी फाटक खुलने के हालात बन रहे हैं।