सूबे के खजाने के राजस्व में अहम भूमिका निभाने वाले रिहंद जलाशय में प्रतिबंध के बावजूद मछलियां मारी जा रही हैं। रात के अंधेरे में कौन कहे, दिन के उजाले में हर दिन कई कुंतल मछलियां जाल में फंसा ली जा रही हैं।
शनिवार को भी रिहंद डैम में ट्यूब के सहारे 15-20 युवाओं का समूह पूरे दिन मछलियों को मारने में लगा रहा। उत्तरप्रदेश-मध्यप्रदेश सीमा पर यह कारोबार कुछ ज्यादा हो रहा है। सड़क के किनारे से दिखते इस नजारे को संबंधितों की आंखें नहीं देख पा रही हैं।
बताते चलें कि रिहंद डैम के मछलियों की आपूर्ति सोनभद्र, सीमावर्ती राज्यों के साथ ही कोलकाता तक की जाती है। इसके लिए प्रतिवर्ष करोड़ों का टेंडर भी होता है, लेकिन बारिश के समय मछलियों का प्रजनन काल होने से उत्तर प्रदेश की एरिया में एक जुलाई से 30 अगस्त और मध्यप्रदेश की एरिया में 15 जून से 15 अगस्त तक मछली मारने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाता है।
मत्स्य विभाग का मानना है कि जलस्तर बढ़ने के कारण मछलियां तेजी से किनारे की तरफ भागती हैं, इसके चलते इन्हें मारना काफी आसान होता है। इनकी वंशवृद्धि न रुके, इसके लिए बारिश में मछली मारना प्रतिबंधित कर दिया गया है।
प्रतिबंध के उल्लंघन पर एक साल की सजा और जुर्माने के साथ ही बिना वारंट गिरफ्तारी का प्रावधान है। इसकी निगरानी के लिए अधिकारियों-कर्मियों की तैनाती भी की गई है। इसके बावजूद इस पर प्रतिबंध नहीं लग रहा है।