एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झील का दर्जा रखने वाला गोविंद वल्लभ पंत सागर (रिहंद डैम) जल्द ही पर्यटन के क्षितिज पर नजर आएगा। इसमें कश्मीर और उत्तराखंड की तर्ज पर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल के तहत वाटर रेस्टोरेंट (नौकानुमा हट में खान-पान की सुविधा), नौका विहार और अन्य गतिविधियों के संचालन की कवायद शुरू कर दी गई। गुरुवार की शाम पर्यटन एवं वन विभाग की टीम ने इसके लिए अनपरा से सटे बेलवादह, शक्तिनगर से सटे कोटा स्थित रिहंद डैम तट का जायजा लिया।
ऊर्जांचल की वादियां प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हैं। इसको देखते हुए शासन स्तर से ऊर्जांचल को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए डीएम संजय कुमार की अध्यक्षता में एक टीम बनाई गई है। इसमें वाइल्ड लाइफ, वन विभाग और पर्यटन विभाग के लोगों को शामिल किया गया है। चार सौ वर्ग मील में फैले रिहंद डैम में जल पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इसको देखते हुए पर्यटन महकमे की ओर से यहां वाटर रेस्टोरेंट, नौका विहार (क्रूज) और पर्यटन से जुड़ी अन्य गतिविधियों के लिए योजना बनाई जा रही है। गुरुवार की शाम चार बजे क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी वाराणसी रवींद्र सिंह, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी बृजेश सिंह, डीएफओ रेणुकूट तुलसीदास की अगुवाई वाली टीम ने बेलवादह और कोटा का जायजा लिया। बेलवादह में वाटर रेस्टोरेंट और वन विहार दोनों के हिसाब से परिस्थितियां उपयुक्त मिलीं। आसपास पर्यटन की दृष्टि से बाजार विकसित करने की संभावनाओं के लिए टीम ने यहां के प्रधान हरदेव सिंह से चर्चा की।