आंधी के साथ बूंदाबांदी से तपन और उमस से तो राहत मिली, लेकिन इसके चलते पारेषण और वितरण लाइनों में आई खराबी से राज्य सेक्टर की बिजली परियोजनाओं के उत्पादन में रिकार्ड कमी करनी पड़ी। राज्य सेक्टर में 1770 मेगावाट की थर्मल बैकिंग की गई। निजी क्षेत्र की अनपरा सी (लैंको) में एक इकाई बंद करा 600 मेगावाट की थर्मल बैकिंग कराई गई।
शनिवार की शाम और रात में आंधी के साथ बूंदाबांदी हुई। लगातार आ रही आंधी के चलते अलग-अलग जगहों पर एहातियातन विद्युत कटौती करनी पड़ती है। आंधी के बाद लाइनों की खराबी से आपू्र्ति बाधित हो जा रही है। इससे खपत भी घट जा रही है। चूंकि बिजली की उतनी ही आपूर्ति हो सकती है, जितनी खपत हो। इसी वजह से शक्ति भवन स्थित सिस्टम कंट्रोल को करीब एक सप्ताह से थर्मल बैकिंग का सहारा लेना पड़ रहा है।
रविवार को अनपरा परियोजना में करीब चार सौ मेगावाट, अन्य परियोजनाओं में 1370 मेगावाट उत्पादन घटवाया गया। लैंको में छह सौ मेगावाट की एक इकाई बंद करा दी गई। 210 मेगावाट वाली पनकी में कई दिन से उत्पादन बंद है। अनपरा डी की पांच सौ मेगावाट वाली पहली इकाई शनिवार रात डेढ़ बजे उत्पादन पर ले ली गई लेकिन बिजली खपत में कमी के चलते महज डेढ़ सौ मेगावाट उत्पादन होता रहा।
इसी क्षमता की दूसरी इकाई बंद है। समाचार दिए जाने तक 1630 मेगावाट की अनपरा परियोजना में 1215, एक हजार मेगावाट की अनपरा डी में 150, 1288 मेगावाट की ओबरा में 618, 1140 मेगावाट की पारीक्षा में 152, 665 मेगावाट की हरदुआगंज में 189, कुल 2324 (उत्पादन क्षमता 5933 मेगावाट) मेगावाट बिजली पैदा हो रही थी।
थर्मल बैकिंग की दशा में पैदा होने वाली बिजली की लागत बढ़ जाती है, जिसका नुकसान उत्पादन निगम को उठाना पड़ता है। विद्युत वितरण निगम को कई बार बिना बिजली लिए ही निजी क्षेत्र की परियोजनाओं को करार के अनुसार तीन से साढ़े रुपये प्रति यूनिट भुगतान करना पड़ता है।
अनपरा सी के महाप्रबंधक सतीश कुमार ने बताया कि उतनी ही बिजली ही पैदा की जाती है, जितनी आपूर्ति हो। रविवार की सुबह शक्तिभवन से छह सौ मेगावाट की थर्मल बैकिंग का आदेश मिला था। उत्पादन घटाने के लिए अनपरा सी परियोजना की एक इकाई बंद कर दी गई है।