एनसीएल की ओर से खड़िया के पुनर्वास क्षेत्र में वार्फवाल निर्माण को लेकर जारी गतिरोध दूर होने के बजाए और उलझ गया है। रविवार विवाद हल करने पहुंचे एसडीएम ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद इस मामले में व्यापक अध्ययन की जरूरत बताते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की रिपोर्ट की संस्तुति कर दी।
एनसीएल खड़िया के सभागार में वार्फवाल (रेल रैक लोडिंग प्वाइंट) के निर्माण में ग्रामीणों की आशंकाओं व गतिरोध दूर करने के लिए बैठक आयोजित की गई। बैठक में एनसीएल खड़िया के महाप्रबंधक, एसडीएम, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी, प्रभारी निरीक्षक सहित खड़िया गांव (नाई टोला) के ग्रामीण मौजूद रहे। सभी की मौजूदगी में मुद्दे पर सुनवाई हुई। जनप्रतिनिधियों व प्रभावित क्षेत्र के रहवासियों ने वार्फवाल निर्माण के बाद उड़ने वाली धूल तथा प्रदूषण पर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना था कि पुनर्वास बस्ती को अलग सुरक्षित स्थान पर बसाएं बिना निर्माण किसी दशा में ठीक नहीं है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना था कि बस्ती हटाई जाए तो वार्फवाल का निर्माण कहीं और हो। आरोप यह भी था कि एनसीएल की ओर से अपने सीएसआर के मद से इस बस्ती में कोई कार्य नहीं कराया गया। बस्ती को अन्यत्र शिफ्टिंग के बिंदु पर एनसीएल ने बिना अधिग्रहण पुनर्वास के लिए असमर्थता जताई । जन सुनवाई के बाद सभी अधिकारियों ने वार्फवाल के स्थान का निरीक्षण किया। इस मौके पर जनता की बात सुनी गई। सभी पक्षों को सुनने के बाद एसडीएम रमेश कुमार ने एनसीएल खड़िया के अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस संबंध में प्रदूषण और अन्य पर्यावरण प्रावधानों के तहत किसी आईआईटी से रिपोर्ट ले ली जाए। रिपोर्ट के आधार पर निर्माण कराया जाए। एसडीएम ने जन कल्याण के लिहाज से एनसीएल को सीएसआर के तहत ज्यादा से ज्यादा सुविधा देने को भी कहा।