मेडिकल काॅलेज में संचालित अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था अब पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। सीएमओ के निर्देश के बावजूद निजी केंद्रों के चिकित्सक अल्ट्रासाउंड के लिए जिला अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं। एक सप्ताह से जांच ठप होने से मरीज परेशान हैं।
मेडिकल काॅलेज से संबंद्ध जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद दो साल से खाली है। यहां आने वाले मरीजों की परेशानी को देखते हुए तत्कालीन डीएम चंद्र विजय सिंह के निर्देश पर जिले में संचालित निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों के चिकित्सकों का रोस्टर बनाकर एक-एक दिन जिला अस्पताल में सेवा देने के लिए नामित किया गया था।
तब से यह प्रक्रिया चल रही है। सीएमओ की ओर से हर माह रोस्टर जारी किया जाता है। मरीजों की भीड़ न लगे, इसके लिए उन्हें पहले से टोकन देकर नंबर आवंटित कर दिया जाता था। पिछले कुछ महीनों से निजी केंद्र के चिकित्सक अक्सर गायब रह रहे हैं या टेक्नीशियन और अन्य स्टॉफ को भेज रहे हैं।
लिहाजा अब अल्ट्रासाउंड के लिए नंबर मिलना भी बंद कर दिया गया। चिकित्सक या फिर टेक्नीशियन की मौजूदगी होने पर ही जांच होती थी, वरना मरीजों को लौटा दिया जाता है। पिछले एक सप्ताह से कोई डॉक्टर नहीं पहुंच रहा। ऐसे में जांच पूरी तरह से ठप है। रोजाना करीब 40 मरीजों को वापस लौटना पड़ रहा है। मजबूरन उन्हें निजी केंद्रों पर एक हजार तक खर्च करना पड़ रहा है।
एक सप्ताह में इन सेंटरों से नहीं पहुंचे चिकित्सक
22 जनवरी को चोपन स्थित एक डायग्नोस्टिक सेंटर के चिकित्सक की ड्यूटी थी, मगर वह नहीं पहुंची। 23 जनवरी को बभनी के अल्ट्रासांउड सेंटर के चिकित्सक भी रोस्टर के बावजूद नहीं आए। 24 को म्योरपुर और 25 को रॉबर्ट्सगंज के एक केंद्र के चिकित्सक की ड्यूटी लगी थी। सोमवार को ओबरा और मंगलवार को दुद्धी के डायग्नोस्टिक सेंटर के चिकित्सक की ड्यूटी लगी थी। इन तिथियों पर किसी भी चिकित्सक के पहुंचने से सेवा पूरी तरह से ठप रही। मरीजों को वापस लौटना पड़ा।
चिकित्सक की ब्लड बैंक में लगा दी ड्यूटी
जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं होने से सेवाएं प्रभावित हैं। पूर्व में निजी चिकित्सकों के अलावा प्रशिक्षण प्राप्त एक जेआर की ड्यूटी भी अल्ट्रासाउंड के लिए लगाई जाती थी। करीब एक माह से मेडिकल काॅलेज प्रबंधन की ओर से उनकी ड्यूटी जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में लगा दी गई है। इससे सेवाएं अधिक प्रभावित हो गईं।
मरीजों की सहूलियत के लिए निजी केंद्रों के चिकित्सकाें की रोस्टर वार ड्यूटी लगाई जाती है। अगर कहीं कोई लापरवाही बरती जा रही है तो जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।