रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के कुशी गांव निवासी प्रगतिशील किसान मानसिंह ने आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। कभी महाराष्ट्र की एक निजी ट्रांसपोर्ट कंपनी में नौकरी करने वाले मानसिंह आज पपीते और अन्य फसलों की मिश्रित खेती से सालाना करीब चार लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है। ग्रेजुएशन और पॉलिटेक्निक की पढ़ाई पूरी करने के बाद मानसिंह रोजगार के लिए महाराष्ट्र गए थे। वहां प्रगतिशील किसानों से मुलाकात और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने गांव लौटकर खेती को ही आजीविका बनाने का फैसला किया। उद्यान एवं कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन तथा सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर वर्ष 2024 में 10 बिस्वा भूमि पर पपीते की खेती शुरू की। पहले ही वर्ष अच्छे परिणाम मिलने पर 2025 में इसका रकबा बढ़ाकर तीन बीघा और 2026 में पांच बीघा कर दिया।
मानसिंह लाल गूदे वाली उन्नत किस्म के पपीते की खेती करते हैं। प्रत्येक पौधे से औसतन 40 से 45 किलोग्राम तक फल प्राप्त होता है, जिसकी स्थानीय बाजार में 10 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री हो जाती है। उनका कहना है कि केवल पपीते की खेती से ही उन्हें करीब दो लाख रुपये का शुद्ध वार्षिक लाभ होता है। उन्होंने पपीते के पौधों के बीच खाली स्थान का उपयोग करते हुए लहसुन, हल्दी, गोभी, सुरन, प्याज और अन्य सब्जियों की मिश्रित खेती भी शुरू की है। इससे उनकी कुल वार्षिक आय बढ़कर लगभग चार लाख रुपये हो गई है। जैविक खाद के अधिक उपयोग और वैज्ञानिक खेती से उत्पादन की गुणवत्ता के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बनी हुई है।
नुकसान से उबरे, फसल विविधीकरण से बदली तस्वीर
मानसिंह बताते हैं कि छह वर्ष पहले तक वह धान, गेहूं, मिर्च और टमाटर जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे, लेकिन लगातार नुकसान होने पर उन्होंने फसल विविधीकरण का रास्ता अपनाया। आज उनकी मेहनत रंग ला रही है। आधुनिक खेती की जानकारी लेने के लिए सोनभद्र ही नहीं, आसपास के जिलों से भी किसान उनके खेत पर पहुंच रहे हैं। कृषि एवं उद्यान विभाग भी उन्हें प्रगतिशील किसान के रूप में अन्य किसानों के लिए उदाहरण बना रहा है।