इसके तहत एयरपोर्ट को भविष्य में इस तरह से विकसित किया जाएगा कि यह पूर्वांचल का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनेगा। पांच किमी लंबे रनवे के साथ यात्री सुविधाओं को भी विस्तार दिया जाएगा। वर्तमान में एयरपोर्ट का कुल क्षेत्रफल करीब 68 एकड़ है, जबकि प्रस्तावित क्षेत्र 700 एकड़ में होगा।
इसके लिए शासन स्तर से पत्राचार शुरू हो गया है। एएआई की ओर से प्रारंभिक डिजाइन भी तैयार कर ली गई है। एयरपोर्ट के विस्तार की यह रूपरेखा इस क्षेत्र के औद्योगिक महत्व और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इसमें विशेष रुचि दिखाई है।
निर्माणाधीन म्योरपुर एयरपोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
एएआई की ओर से तैयार किए गए प्रारंभिक डिजाइन पर गौर करें तो एयरपोर्ट के विस्तार के लिए मुर्धवा-बीजपुर मार्ग को अन्यत्र डायवर्ट करना पड़ सकता है। निर्धारित दूरी के लिए रनवे बलियरी गांव तक चला जाएगा। यही नहीं दूसरे छोर को परनी गांव तक ले जाना होगा। इसके अलावा आसपास के म्योरपुर, कुंडाडीह, बलियरी, परनी, हरहोरी व बभनडीहा आदि गांव भी इसके दायरे में आएंगे।
धीमी गति ने बढ़ाई मुश्किल
निर्माणाधीन एयरपोर्ट में वर्तमान समय में 60 फीसदी तक काम लगभग पूरा हो चुका है। भीतरी भाग की बात करें तो बिल्डिंग के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर समेत अन्य सुविधाओं को यहां फाइनल टच दिया जा रहा है जबकि बाहरी हिस्से का काम थोड़ा धीमी गति से हो रहा है। बीएसएनएल की केबल हो या विद्युत आपूर्ति के लिए केबल का काम सब धीमी गति से हो रहा है। ऐसे में बाहरी कामों को लेकर ही एयरपोर्ट अथॉरिटी आफ इंडिया के लोगों के माथे पर बल पड़ा हुआ है।
देश के प्रमुख उद्यमी घनश्याम दास बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को की जब आधारशिला रखी जा रही थी तभी यहां एयरपोर्ट की जरूरत महसूस हुई। म्योरपुर कस्बे से कुछ दूरी पर 1954 में हवाई पट्टी की आधारशिला रखी गई। कुछ ही साल में यहां से चार्टर्ड प्लेन की उड़ान भी शुरू हो गई। उस समय जीडी बिड़ला अपनी कंपनी की देखरेख करने के लिए प्लेन से आते थे। उनका विमान म्योरपुर हवाई पट्टी पर उतरता था और वहां से वह कार से रेणुकूट जाते थे।
इसके बाद अन्य अधिकारी व राजनेता भी हवाई पट्टी का इस्तेमाल करने लगे। वर्ष 1989 में जब सोनभद्र अलग जनपद बना तब इसके विस्तार की कवायद शुरू हुई। फिर इसे व्यवस्थित कर 1996 में म्योरपुर से उड़ान शुरू कर दी गई। उस समय विक्टर थापा चार्ली और विक्टर थापा डेल्टा नाम के दो विमान सप्ताह में तीन दिन उड़ते थे। छह माह तक हवाई सफर ठीकठाक रहा, बाद में कंपनी घाटे में चली गई और उड़ान बंद हो गई।
म्योरपुर का इलाका औद्योगिक रूप से बेहद समृद्ध है। यहां खनिज संपदा प्रचुर मात्रा में है। एनसीएल, एनटीपीसी और राज्य सरकार के अधीन विद्युत उत्पादन इकाइयां इसी क्षेत्र में हैं। एल्युमीनियम का सबसे बड़ा कारखाना हिंडाल्को भी यहां मौजूद है। एनटीपीसी की इकाइयों का विस्तार भी प्रस्तावित है।
सोना और पोटाश के लिए उत्खनन कार्य शुरू होने के बाद इस क्षेत्र की उपयोगिता और बढ़ जाएगी। सरकार स्वर्ण अयस्क निकालने के लिए ग्लोबल टेंडर की तैयारी में है। इससे विदेशी कंपनियां भी यहां आएंगी। म्योरपुर से मप्र, छत्तीसगढ़, झारखंड की सीमाएं भी पास में है। इन राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में कोई दूसरा एयरपोर्ट नहीं है। वहां के लोग हवाई सेवा के लिए बनारस का सफर करते हैं। बनारस के एयरपोर्ट का दबाव कम करने के लिए भी म्योरपुर एयरपोर्ट का विस्तार करने की तैयारी है।
म्योरपुर एयरपोर्ट के विस्तार की कार्ययोजना के बारे में अभी जानकारी नहीं है। फिलहाल हमारी कोशिश है कि वर्तमान में जो कार्य हो रहा है, उसे नवंबर से पहले हर हाल में पूरा कराकर उड़ान शुरू कर दी जाएगी। भविष्य की जो भी रूपरेखा होगी, उस पर शासन के निर्देशों के अनुसार काम होगा। - चंद्र विजय सिंह, डीएम।