दाल-रोटी खाना तो दुश्वार था ही। अब बाटी-चोखा पर आफत आ गई है। खाद्य वस्तुओं की महंगाई गरीब ही नहीं बल्कि मध्यवर्ग का इम्तिहान लेने पर तुली हुई है। दाल से लेकर सब्जी तक खाने-पीने की हर वस्तु महंगी है। एक माह बिना सब्सिडी वाली रसोई गैस भी महंगी हो गई है। इससे गृिहणियों को कीचन संभालना मुश्किल हो गया है। अरहर की दाल और बैगन सब पर भारी पड़ रही है। ऐसे में लोगों की खाली रह जा रही और खाने का स्वाद नहीं मिल रहा।
आटा, दाल, चावल की कीमतों में पिछले माह की तुलना में बढ़ोतरी हुई है। बैगन, टमाटर और परवल जैसी कुछ ज्यादा दिनों तक टिकने वाली सब्जियों की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। हालांकि मौसमी सब्जियों की कीमत में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। दालों की कीमत में इजाफा हुआ है। मौसमी और जल्द खराब होने वाली सब्जियों की कीमतें तो नियंत्रित हैं लेकिन टिकाऊ सब्जियों के दाम में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। टमाटर की कीमत तो एक महीने के भीतर डेढ़ गुना तक हो गई है।
आलू इस बार पिछले साल की तुलना में दो गुना दर से बिक रहा है। दाल ही नहीं बल्कि अबकी बाटी-चोखा खाना मुश्किल हो गया है। सब्जी व्यवसायी सागर सोनकर ने बताया कि मौसमी सब्जियों की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है लेकिन आलू, परवल, बैगन के दाम तेज हैं। राकेश चौबे, शशिकांत द्विवेदी, जमालुद्दीन, मुमताज अली, किशन केशरी का कहना है कि खाद्य पदार्थों की महंगाई सबको परेशान किए हुए है। घर चलाना मुश्किल हो रहा है।