आदिवासी वनवासी महासभा की बैठक रासपहरी स्थित कार्यालय पर हुई। इसमें वन संरक्षण संशोधन अधिनियम 2023 पर असंतोष जताते हुए लोगों में जनजागरण के लिए अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि नया कानून आदिवासी और पर्यावरण विरोधी है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की सभी विपक्षी पार्टियों के विरोध और आदिवासी समाज की आपत्ति के बावजूद आदिवासी विरोधी इस कानून पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर कर दिया। यह कानून वन अधिकार कानून 2006 को विफल कर देगा और आदिवासियों के हाथों में आई पुश्तैनी जमीनों को छीन लेगा। वक्ताओं ने कहा कि नया वन संरक्षण संशोधन बिल कारपोरेट घरानों को वन भूमि उपलब्ध कराने के लिए लाया गया है। आदिवासी और पर्यावरण विरोधी इस कानून को सरकार ने हड़बड़ी में लागू किया है। इस बिल से उत्तर पूर्व के मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा जैसे वनाच्छादित राज्यों में बड़े पैमाने पर वनों का नुकसान होगा। ऐसी स्थिति में आदिवासियों को इस कानून से होने वाले नुकसान से अवगत कराया जाएगा। नौ अगस्त को आदिवासी दिवस के दिन इसके विरोध में सम्मेलन किया जाएगा।बैठक का संचालन कृपाशंकर पनिका ने किया। बैठक में राजेंद्र प्रसाद गोंड, शिव प्रसाद गोंड , मंगरु प्रसाद श्याम, विरझन गोंड, मनोहर गोंड, रामा गोंड, महावीर गोंड, इंद्रदेव खरवार, आलोक गोंड, रामविचार गोंड, सविता गोंड, गुंजाइश गोंड, रंजू देवी आदि मौजूद रहे।