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रेणुका नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन

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ओबरा। रेणुकापार के ग्रामीणों ने रविवार को रेणुका नदी के किनारे प्रदर्शन करते हुए शासन प्रशासन को चेताया कि अब रेणुकापार के ग्रामीणों की उपेक्षा बर्दाश्त नही की जायेगी। पुल के प्रस्ताव के निरस्त होने की सूचना से नाराज ग्रामीणों ने कहा कि कोरोना संकट को लेकर पुल निर्माण पर रोक लगाना शासन की विफलता है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुए इंटक के जिलाध्यक्ष हरदेव नारायण तिवारी ने कहा कि सेतु निगम की तैयारी के बावजूद नौकरशाहों द्वारा पुल निर्माण में बाधा डालना पूरी तरह संवेदनहीनता का परिचायक है। आज जब हर जगह बेरोजगारी का अलाम है वही पुल निर्माण शुरू होने से भारी पैमाने पर रोजगार पैदा होता। लेकिन इस बहुउपयोगी पुल के निर्माण को रोक कर कोरोना संकट के लिए बजट एकत्रित करने की मंशा पूरी तरह आदिवासी अंचल की उपेक्षा है। कहा कि आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी मुख्यधारा से जुड़ने से वंचित आदिवासियों को कब तक कालापानी जैसी स्थिति में रहने के लिए मजबूर किया जाएगा। इंटक महासचिव शमीम अख्तर खान एवं राम दुलारे गोड़ ने कहा कि इस पुल से ही 1320 मेगावाट की निर्माणाधीन ओबरा सी की पाइपलाइनें भी जानी है साथ ही पुल निर्माण के बाद परिवहन सेवाएं भी मजबूत होंगी। खासकर विकास का रुका पहिया भी इसी पुल के निर्माण से चल सकेगा। ऐसे में पुल निर्माण में बाधा खड़ी करना बर्दास्त योग्य नहीं है। इस दौरान बृजेश तिवारी,जमशेद खान, राम विलास दुबे, शिवशंकर यादव,मनोज सिंह गोड़,एकमानी देवी,बसंती देवी,लालजी साहनी,आशा शर्मा,दूधनाथ खरवार,जितेंद्र गोड़ ,धर्मेंद्र सिंह खरवार,लक्ष्मण यादव सहित तमाम ग्रामीण मौजूद थे।
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