अनपरा/शक्तिनगर। एफडीआई के खिलाफ एनसीएल में श्रमिकों की हड़ताल से मंगलवार को कोयला उत्पादन लड़खड़ा गया। श्रमिक नेताओं ने हड़ताल शत प्रतिशत सफल होने का दावा किया जबकि कोल प्रबंधन ने भी माना कि हड़ताल का असर उत्पादन व प्रेषण डिस्पैच पर पड़ा है।
हड़ताल में शामिल संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने दावा किया कि कोल इंडिया में सौ फीसदी विदेशी निवेश के विरोध में एनसीएल की सभी कोयला खदानों में दूसरे दिन मंगलवार को उत्पादन व डिस्पैच ठप रहा। भारतीय मजदूर संघ से जुड़े संगठन की तरफ से सोमवार से पांच दिनी हड़ताल शुरू की गई थी। इस बीच मंगलवार को हड़ताल में सीटू, एटक, इंटक व एचएमएस के शामिल होने से आंदोलन को ताकत मिली और इसका व्यापक असर देखने को मिला। बीएमएस छोड़ चार श्रमिक संगठनों की तरफ से मंगलवार को की गई एक दिनी सांकेतिक हड़ताल के दौरान एनसीएल की सभी कोयला परियोजनाओं में प्रथम पाली से कामकाज लगभग ठप रहा। एनसीएल खड़िया में प्रथम और द्वितीय पाली में कामगारों की अनुपस्थिति के कारण उत्पादन और प्रेषण का काम शून्य रहा। बताते चलें, इसी मसले पर बीएमएस ने 23 से 27 अक्टूबर तक हड़ताल का आह्वान किया है। एनसीएल की कोल परियोजना ककरी, बीना, कृष्णशिला, खड़िया, दुधीचुआ, जयंत, निगाही, अमलोरी, झिंगुरदह, गोरबी, बी एवं आईडब्ल्यूएसएस सीएमपीडीआई तथा मुख्यालय पर सुबह छह बजे से ही हड़ताली कर्मी एफडीआई के विरोध में नारेबाजी करते रहे। खदान क्षेत्र की तरफ जाने वाले मार्ग एटक, इंटक, बीएमएसए, सीटू, एचएमएस आदि संगठनों के झंडे व बैनर से पटे रहे। श्रमिक संगठन के पदाधिकारी अशोक दुबे, अरुण कुमार दुबे, वाईएन सिंह, बघेल, मुन्नीलाल, पीके सिंह, वीरेन्द्र सिंह, ओपी मालवीय, पीएस पांडेय, अशोक पांडेय आदि कार्यकर्ताओं के साथ सभी कोल परियोजनाओं का चक्रमण कर कोल श्रमिकों का उत्साहवर्धन करते रहे। सभी श्रमिक संगठनों के एक साथ हड़ताल पर चले जाने से कोयला उत्पादन व प्रेषण पर प्रतिकूल असर पड़ा है। खदान क्षेत्र स्थित सभी सेक्शन व सीजीएम आफिस में सन्नाटा रहा। हाजिरी घर में अधिकारियों की ड्यूटी लगाकर हाजिरी ली गई।
इस दौरान खड़िया क्षेत्र मेें एटक के बलराम बेलवंशी, सुधीर सिंह, प्रभाकर त्रिपाठी, सीटू के शैलेंद्र चौबे, आनंद सिंह, एचएमएस के बाबूलाल चौधरी, राजेश सिंह, इंटक के अटल बिहारी राम, जितेंद्र सिंह, लक्ष्मण रजक आदि मौजूद रहे।