आदिवासियों के अधिकार की मांग को लेकर आदिवासी अधिकार मंच ने मंगलवार को राबर्ट्सगंज के हाईडिल मैदान से जुलूस निकाला और नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां सभा कर संविधान की रक्षा के लिए आंदोलन को जरूरी करार दिया गया और जनजातियों को लोकसभा, विधानसभा चुनाव में सीटें आरक्षित करने की मांग की गई। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया।
कलेक्ट्रेट में हुई सभा में आईपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने संविधान को संकट में डाल दिया है। संविधान द्वारा प्रदत्त दलित, आदिवासी और उत्पीड़ित समुदाय के अधिकारों को सरकार लगातार खत्म करने में लगी हुई है। कारपोरेट परस्त नीतियों के बदौलत इन तबकों के अस्तित्व व अस्मिता पर हमला किया जा रहा है।
संविधान और उसमें दिए अधिकारों की रक्षा के लिए आदिवासी समाज का यह आंदोलन देश में चल रहे लोकतांत्रिक आंदोलनों की धुरी बनेगा और एक नई जन राजनीति को जन्म देगा, ऐसी मुझे उम्मीद है।
पूर्व मंत्री विजय सिंह गोंड ने कहा कि मुख्य दलों ने आदिवासी समाज के साथ धोखा किया है। भाजपा की केंद्र सरकार आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों पर हमले कर रही है। दस दिन हो गए आंदोलन करते हुए पर किसी भी दल ने आदिवासी समाज के समर्थन में बयान तक देना उचित नहीं समझा जबकि हमने सभी से अपील की थी।
आदिवासी अधिकार मंच के संयोजक दिनकर कपूर ने कहा कि संविधान में आदिवासी, दलित समुदाय को उनकी संख्या के अनुपात में लोस व विस चुनाव में राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का प्रावधान है। इसके अनुपालन का आदेश सर्वोच्च न्यायालय तक ने दिया है। लेकिन मोदी सरकार आदिवासियों की संविधान और इस व्यवस्था में आस्था को खत्म कर रही है। इस मौके पर विजय मरकाम, राम खेलावन गोंड़, अनोखे लाल खरवार, जोखू खरवार, राजेश सचान, राजेंद्र ओयमा, बबई मरकाम, रामाशंकर ओयमा, रामबरन, रामरूप, अरविंद, बसंत, सुरेंद्र पाल आदि मौजूद रहे।