अनपरा परियोजना के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन करते बिजली कर्मचारी
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अनपरा। अनपरा तापीय परियोजना के मुख्य द्वार पर निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में लगातार दूसरे चरण के कार्यक्रम के तहत मंगलवार को संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने विरोध सभा की। इस दौरान पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण प्रस्ताव का विरोध किया।
सभा में इं. रोहित राय एवं हरिशंकर चौधरी ने पूर्वांचल विद्युत वितरण को तीन भागों में विभक्त करने और उसका निजीकरण करने के सरकार के प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया। सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने और निजीकरण के प्रस्ताव को रद्द करने की मांग की। कहा कि निजीकरण से पूर्वांचल जैसे पिछड़े क्षेत्र के किसानों और गरीब तबकों को इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा। सरकार हर सार्वजनिक विभाग का निजीकरण करने में जुटी है उससे पूंजीबादी व्यवस्था कायम करना चाह रही है जिससे पूंजीपतियों का देश की सारी संपत्ति पर आधिपत्य स्थापित हो जाएगा एवं आम जन मानस को इसका सीधे खामियाजा उठाना पड़ेगा। बिजली के निजीकरण के प्रयोग जहां पर भी किया गया है वो विफल रहा है। बिजली के दाम सीधे 10 रुपये हो जाएगा। और उसके बाद हर महीने बढ़ता रहेगा। जिससे कृषि भी बुरी तरह प्रभावित होगी। सरकारी पैसे पर सारा इंफ्रास्ट्रच्कर खड़ा करने के बाद उसको निजी कंपनियों के हवाले करना सरासर गलत है। इस अवसर पर इं. मनिंद्र नाथ, सुशील श्रीवास्तव, शारदा प्रसाद, विशम्भर सिंह, विवेक सिंह, राजकुमार सिंह, विजय बहादुर, अमरनाथ, अभिषेक त्रिपाठी, रविंद्र जायसवाल आदि मौजूद रहे।