500-1000 के पुराने नोटों की बंदी और नए नोटों के चलन का असर बाजार पर दिखने लगा है। सब्जियों के दाम में कमी आई है। आलू, टमाटर, गोभी के दाम आधे हो गए हैं। हालांकि इस इस दौर में घर की महिलाएं परेशान भी हैं। घर की प्रतिदिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए फुटकर की व्यवस्था करने के लिए उन्हें बैंकों पर लाइन भी लगानी पड़ रही है। उधर सब्जी व्यापारी बाजार मंदा होने से परेशान हैं। फुटकर की समस्या ने उनका भी व्यवसाय चौपट कर दिया है।
बड़ी नोटों का प्रचलन बंद करने से पहले फुटकर का पर्याप्त इंतजाम न होने के नाते हर वर्ग प्रभावित है। तियरा नायक गांव निवासी गृिहणी रेखा राव कहती हैं कि पहले पांच सौ, हजार रुपये की नोट मिलने पर यदि घर से कोई सदस्य पांच सौ की नोट लेकर जाता था तो भरपूर सब्जी लेकर आता था। लेकिन अब सौ रुपये में ही सब्जी खरीद हो रही है। वह भी प्रतिदिन की खरीद नहीं हो पा रही। राबर्ट्सगंज के ब्रह्मनगर निवासी सुनीता का कहना है कि सब्जियों के दाम पहले की तुलना में न घटे हैं न बढ़े हैं, लेकिन फुटकर की समस्या ने सब कुछ प्रभावित कर दिया है।
छोटी नोट न मिल पाने के नाते कम सब्जी से ही काम चलाया जा रहा है। सब्जी दूकानदार राना सोनकर ने कहा कि बड़ी नोटों के बंद होने से सब्जी का व्यवसाय काफी मंदा पड़ गया है। पहले वे प्रतिदिन हजारों रुपये की सब्जियां बेच लिया करते थे लेकिन अब तो ग्राहकों के आने का इंतजार करना पड़ रहा है।
इससे हरी सब्जियां सूख रही हैं। संतोष सोनकर ने कहा कि लोग सब्जी खरीद के लिए आ भी रहे हैं तो महज सौ, पचास रुपये की सब्जी लेकर चलते बन रहे हैं। तमाम लोग अब भी बड़ी नोट लेकर आते हैं और फुटकर की समस्या न सुलझने पर बगैर सब्जी लिये ही लौट जा रहे हैं। कहा कि यदि इसी तरह स्थिति रही तो आने वाले दिनों में सब्जी व्यापारियों को काफी संकट से जूूझना पड़ सकता है।