ऊर्जांचल स्थित बिजलीघरों की चिमनियां अभी भी मानक से काफी अधिक प्रदूषण उगल रही हैं। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की तरफ से हो रही आनलाइन निगरानी में इसका खुलासा होने के बाद, इसके नियंत्रण के लिए कवायद तेज कर दी गई है। तीन-चार दिन पूर्व एनजीटी के निर्देश के क्रम में डीएम सीबी सिंह की अगुवाई में हुई बैठक में भी यह मसला छाया रहा। डीएम ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी गिरीशचंद्र वर्मा को टीम बनाकर लगातार स्थलीय निरीक्षण करने, लापरवाही बरतने वालों को नोटिस जारी कर जरूरी कार्रवाई करने तथा इससे उन्हें भी लगातार अवगत कराते रहने का निर्देश दिया है।
प्रदूषण विभाग का मानक है कि पुरानी परियोजना में प्रदूषण का उत्सर्जन प्रतिघनमीटर सौ मिलीग्राम और नई परियोजनाओं में 50 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए लेकिन जो आनलाइन रिपोर्ट आ रही है। उसमें यह मात्रा 150 मिलीग्राम या इससे अधिक मिल रही है। इसको देखते हुए परियोजनाओं की सभी चिमनियों की आनलाइन निगरानी के लिए ओपेसिटी मीटर स्थापित कर, इसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से लिंक करने और प्रदूषण को अधिकतम मानक से नीचे लाने के लिए नई ईएसपी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले दिनों हुई बैठक में पाया गया कि इसकी कवायद अभी पर्याप्त तेजी नहीं पकड़ पा रही है।
इस पर डीएम ने क्षेेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी को एक टीम गठित कर लगातार स्थलीय निरीक्षण करते रहने और लापरवाही पाए जाने पर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उधर, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी जीसी वर्मा ने भी इसकी पुष्टि की। कहा कि चिमनियों से उत्सर्जित हो रहे प्रदूषण को मानक से नीचे लाने के लिए 2017 तक का समय दिया गया है। इससे जुड़ा कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके, इसको लेकर लगातार निगरानी कराई जा रही है।