वन विभाग और पुलिस की ओर से हुए मुकदमों को बिना किसी शर्त के वापस लेने की मांग को गुरुवार को थाने का घेराव करने जा रहे आदिवासियों को पुलिस और पीएसी के जवानों ने रास्ते में रोक लिया। इस दौरान उनकी आदिवासियों से जमकर कहासुनी हुई।
बाद में सभी को भारती इंटर कालेज के खेल मैदान में ले जाया गया। यहां आदिवासियों ने सभा कर पुलिस और वन विभाग पर उत्पीड़न का आरोप लगाया।
गुरुवार को सोन नगर, धूमनगर, धूमा, चोपन, बारी, नेरूईयादाम, रोहिनियादामर, चंदौली के आदिवासी सैकड़ों की संख्या में विण्ढमगंज पहुंचे।
यहां आदिवासियों ने कैमूर क्षेत्र मजदूर किसान महिला संघर्ष समिति के बैनर तले बाजार से जुलूस निकाला और पुलिस और वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए थाने का घेराव करने के लिए चल दिए।
इसकी जानकारी मिलने पर दुद्धी कोतवाली पुलिस और पीएसी भी मौके पर पहुंच गई। आदिवासी तीर-धनुष से लैस होकर विण्ढमगंज थाने से कुद दूर पहले ही पुलिस और पीएसी के जवानों ने उन्हें रास्ते में रोक दिया और थाने की ओर आगे नहीं बढ़ने दिया।
इसको लेकर आदिवासियों की पुलिस और पीएसी जवानों से कहासुनी भी हुई, लेकिन उनकी एक न चली। फिर इंस्पेक्टर दुद्धी कपिलदेव यादव के कहने पर आदिवासी भारती इंटर कालेज के खेल मैदान में पहुंचे।
यहां उन्होंने सभा कर पुलिस और वन विभाग पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही राजकुमारी का कहना था कि पुलिस और वन विभाग के लोग जंगल पर कब्जे के नाम पर आदिवासियों पर फर्जी मुकदमा कर रहे।
उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बिना किसी शर्त के आदिवासियों पर पूर्व में किये गए मुकदमों को वापस लेने की मांग की।
शोभा और मनबसिया ने कहा कि जंगल की जमीन पर आदिवासियों का अधिकार है। लेकिन वन विभाग उन्हें इस पर काबिज होने से रोक रहा है। विभाग के लोग मिलीभगत कर कीमती पेड़ों को जंगलों से कटवा रहे हैं और आदिवासियों को परेशान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह उत्पीड़न किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शन के बाद तहसीलदार दुद्धी दिनेश चंद्र मिश्रा को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान सकुंती, फूलबसिया, धनपति, सुकालो, लालती, चंदवा, श्याम लाल गोड़, राजेंद्र, शंकर, प्रेमचंद आदि रहे।