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Sonebhadra News: कनहर बांध में डूब चुके तीन गांवों के लोग 40 किमी की दूरी तय कर चुनेंगे प्रधान

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सोनभद्र। पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। जिले के 621 ग्राम पंचायतों में चुनाव के लिए सूची शासन को भेजी गई है। इस सूची में तीन वे गांव भी शामिल हैं, जिनका दो तिहाई हिस्सा कनहर बांध के डूब क्षेत्र में समा गया है। मूल गांव सहित यहां की आबादी करीब 40 किमी दूर दूसरे ब्लॉक में बनी पुनर्वास कॉलोनी में विस्थापित हो चुकी है, फिर भी डूब चुके गांव में ही प्रधान और बीडीसी सदस्य का चुनाव होगा। सर्वे में पंचायत राज विभाग की इस चूक से ग्रामीण मतदाता और दावेदार ऊहापोह में हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि कहां चुनाव लड़ेंगे, कैसे वोट करेंगे।
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वर्ष 2021 में हुए पंचायत चुनाव के दौरान जिले में 629 ग्राम पंचायतें थीं। इन गांवों में चुनाव के बाद नए प्रधान चुने गए थे। करीब डेढ़ साल बाद वर्ष 2022 में हुए नगर पालिका रॉबर्ट्सगंज के सीमा विस्तार में कुल 17 गांव नगर में शामिल हो गए। इसमें आठ ग्राम पंचायत पूरी तरह शामिल हुईं, जबकि अन्य का आंशिक हिस्सा था। लिहाजा ग्राम पंचायत की सूची से आठ नाम अलग कर दिए गए। इनके प्रधानों का अधिकार भी खत्म हो गए। इसके बाद से ही 621 ग्राम पंचायत अस्तित्व में हैं। यूपी, झारखंड और छत्तीसगढ़ सीमा पर वर्ष 1976 से निर्माणाधीन कनहर बांध का निर्माण पूरा हो चुका है। बांध में पानी भरने के साथ बभनी और दुद्धी ब्लॉक के 11 गांव भी इसमें डूब गए हैं। इन गांवों में बभनी ब्लॉक के सिंदूर, कोरची और भिसूर ग्राम पंचायत भी शामिल हैं। इन पंचायतों का दो तिहाई हिस्सा डूब क्षेत्र में समा गया है। इसमें मूल गांव भी शामिल है। आबादी के नाम पर बांध के किनारे छिटपुट लोग ही बचे हैं। गांव के इन अवशेष टोलों की आबादी भी एक हज़ार से कम है। इन गांवों का नए सिरे से पुनर्गठन की जरूरत थी, मगर पंचायती राज विभाग ने इसे दरकिनार कर चुनाव कराए जाने वाले पंचायतों में इन तीनों गांव के भी नाम शामिल कर लिए हैं। अब समस्या यह है कि ज़ब इन गांवों में पर्याप्त आबादी ही नहीं तो विभाग चुनाव कैसे कराएगा। मूल गांव के विस्थापित होने के बाद भी उनका नाम सूची में बरकरार रखना भी लोगों की समझ से परे है।
बभनी ब्लॉक में गांव डूबा, जहां बसा वह दुद्धी में
कनहर बांध में पानी भरने के बाद डूब क्षेत्र के गांवों को खाली करा लिया गया है। ये तीनों गांव बभनी ब्लॉक में थे। यहां के लोगों को पुनर्वास कॉलोनी अमवार में बसाया गया है, जो दुद्धी ब्लॉक में है। दो तिहाई गांव वहीं है, जबकि डूब से बाहर टोले के लोग अपने गांव में बसे हुए हैं। गांव से पुनर्वास कॉलोनी की दूरी 40 किमी है। बिना पुनर्गठन के ही चुनाव होता है तो प्रत्याशियों को 40 किमी की परिक्रमा करनी होगी। वहीं, मतदाताओं को भी तमाम दुश्वारियों से गुजरना होगा।
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मूल गांव के नाम पर ही हो चुनाव
विस्थापित गांव सुंदरी के पूर्व प्रधान फणिश्वर जायसवाल का कहना है कि गांव की मतदाता सूची में अभी भी सभी ग्रामीणों के नाम हैं। हमारा मूल गांव वही है। हम भले ही पुनर्वास कॉलोनी में है, लेकिन इसी नाम पर चुनाव होना चाहिए। वहीं, कोरची के पूर्व प्रधान गंभीरा प्रसाद का कहना है कि गांव का सिर्फ एक टोला डूब क्षेत्र से बाहर है। शेष गांव बांध के डूब क्षेत्र में समाहित हो चुका है। गांव का चुनाव इसी आधार पर होना चाहिए।
पंचायत चुनाव के लिए 621 गांवों की सूची भेजी गई है। नगर पालिका के सीमा विस्तार में शामिल हुए गांव पहले ही कट गए हैं। अन्य सभी गांव यथावत हैं। वार्डों के पुनर्गठन का कार्य चल रहा है। आबादी के अनुसार सर्वे कर वार्ड निर्धारित करते हुए शासन को सूचना भेजी जाएगी। -नमिता शरण, जिला पंचायत राज अधिकारी।
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