चतरा ब्लॉक के करमांव में दूर से पेयजल रिक्सा ट्राली से ढुलाई करते लोग।
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सोनभद्र। करमांव गांव में जहां 14 ग्राम समूह पाइपलाइन परियोजनाओं की आधारशिला 22 नवंबर को होनी है उस ग्राम पंचायत के कुछ टोलों के लोग अब भी घाघर नदी का पानी पीने को विवश हैं। हैंडपंपों से प्रदूषित पानी आने की वजह से लोग करीब 500 मीटर की दूरी से पानी लाते हैं। पेयजल परियोजना चालू होने के बाद लोगों को काफी राहत होगी।
चतरा ब्लॉक के करमांव ग्राम पंचायत की कुल आबादी करीब 2400 है। धंधरौल बस्ती के लल्लन सिंह पटेल ने कहा कि पहाड़ी की दूसरी तरफ धंधरौल बस्ती में 50 परिवार रहते हैं। बस्ती की आबादी करीब 150 के आस-पास है। बस्ती में सामान्य दिनों में पेयजल संकट होता है। बस्ती में दो हैंडपंपों प्रदूषित पानी निकलता है। गर्मी में भूजल खिसकने से हैंडपंपों पानी नहीं आता जिससे बस्ती के लोग घाघर नदी का पानी पीने के लिए लाते हैं। धंधरौल बांध बने 100 साल पूरे हो गए, लेकिन अब तक बस्ती में पेयजल की समस्या दूर नहीं हो सकी है। करमांव के शिवमूरत और शेषनाथ ने कहा कि ग्राम पंचायत में 10 सरकारी हैंडपंप लगे हैं। इसमें सिर्फ दो हैंडपंपों से ही साफ पानी निकलता है। गांव के कुछ लोग करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित सरकारी कूप से पानी लाते हैं। बबुरी गांव के राजेन्द्र, शोभनाथ और गुलाब सिंह ने कहा कि धंधरौल बांध के आस-पास गांवों में हर घर टोटी से जलापूर्ति होने पर लोगों की समस्या दूर हो जाएगी।
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सात साल बाद खराब हैंडपंप की ली सुधि
सोनभद्र। करमांव ग्राम पंचायत में सात वर्षों से खराब पड़े हैंडपंप की मरम्मत नहीं हो सकी थी। अब जबकि ग्राम पंचायत में मुख्यमंत्री के आने का कार्यक्रम तय हुआ है तो खराब हैंडपंपों की मरम्मत की याद जनप्रतिनिधियों को आई है। शनिवार को ग्राम पंचायत के मुसहर बस्ती में सात साल से खराब हैंडपंप की मरम्मत कराई गई। बस्ती के रहने वाले बुजुर्ग रामधारी ने बताया कि हैंडपंप सात साल से खराब था।