अनपरा। कोविड-19 महामारी के दौर में जिला संयुक्त चिकित्सालय अनपरा डिबुलगंज जो 100 शैय्या का अस्पताल है, खुद ही बीमार हो गया है। इससे लोगों को स्वास्थ्य सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा गंभीर प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र में स्थित अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ सुपर स्पेशलिटी वाले अस्पताल में परिवर्तित किये जाने के लिए स्पष्ट आदेश वर्ष-2018 में जारी किया है। लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई भी ठोस पहल जमीन पर नही उतर पायी। हालात यह है कि ऊर्जांचल में गंभीर प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र में स्थित जिला संयुक्त चिकित्सालय अनपरा, डिबुलगंज खुद अपने इलाज को मोहताज है। यहां पिछले एक सप्ताह से लैब टेक्निशियन के न होने के कारण कोविड-19 की जांच नहीं हो पा रही है। बुधवार को कोविड-19 का वैक्सिनेशन भी नहीं हो पाया। जिला संयुक्त चिकित्सालय अनपरा डिबुलगंज में कोई भी जिम्मेदार डॉक्टर व प्रभारी नहीं मिल रहे हैं, जो लोगों को कोविड-19 के लक्षणों की जांच व वैक्सीन के बारे में जानकारी दे सके। इसी तरह शक्तिनगर स्थित कोटा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी कोविड-19 जांच नही हो सकी। सामाजिक कार्यकर्ता पंकज मिश्रा आदि ने संयुक्त चिकित्सालय में पैरामेडिकल स्टाफ सहित ऑक्सीजन व समस्त संसाधनों की व्यवस्था अविलंब जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट व औद्योगिक परियोजनाओं के सीएसआर मद से किए जाने की मांग की।