सोनभद्र। जिले में युवाओं में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। आत्महत्या करने वालों में 15 साल से लेकर 40 साल तक के लोगों की संख्या 85 फीसदी है। इसके पीछे पारिवारिक कलह, आर्थिक तंगी, प़ढ़ाई का दबाव या मानसिक तनाव रहा है।
आकड़ाें पर गौर करें तो वर्ष 2021 में आत्महत्या के 165 मामले सामने आए थे। 2022 में यह बढ़कर 206 हो गई। जबकि 2023 में संख्या 200 के पार रही। कुछ यहीं स्थिति 2024 में भी है। जिले में इस साल 90 से 95 लोगों ने आत्महत्या की है। इनमें 15 वर्ष से 40 वर्ष तक के लोगों की संख्या 85 फीसदी है। अगर चार सालों के आकड़ों पर गौर करें तो औसत जिले में अमूमन हर दूसरे दिन एक व्यक्ति खुदकुशी रहा है। पढ़ाई के दबाव, बेरोजगारी, आर्थिक तंगी से परेशान होकर लोग यह कदम उठा रहे हैं। जिले में तीन महीने में 35 से अधिक लोगों ने आत्महत्या की है। इनमें अधिकांश युवा हैं। जिला अस्पताल में रोजाना एक से तीन मरीज आत्महत्या के प्रयास वाले पहुंच रहे हैं। जिले में ऐसी घटनाओं पर अंकुश नहीं लग रहा है। ऐसी घटनाओं में किसी को अपना बेटा खोना पड़ा तो किसी का सुहाग उजड़ गया। किसी घटना में बेटे के सिर से मां का साया हट गया।
आर्थिक तंगी और पढ़ाई का दबाव, घरेलू कलह के कारण युवाओं में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ी है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए जनजागरूकता की जरूरत है। अभिभावकों भी बच्चों पर अनावश्यक दबाव देने से बचे। गलतियों पर उन्हे अच्छे से समझाएं। - ऋचा पांडेय, मनोचिकित्सक-मेडिकल कॉलेज लोढ़ी।