सोनभद्र जिले में चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां सरकारी अस्पताल में मरीजों को शुगर की दवा बांट दी गई। मरीज इसका सेवन भी कर गए। बाद में जांच रिपोर्ट में पता चला कि दवाएं कारगर नहीं थीं।
नमूनों की जांच और उसकी रिपोर्ट आने में महीनों का अंतराल लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में मरीजों को शुगर की दवा बांट दी गई। करीब दस हजार मरीज इसका सेवन भी कर गए।
विज्ञापन
छह माह बाद आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वह दवा गुणवत्ता पर खरी नहीं है। उसकी क्षमता तय मानक से काफी कम है। इसी तरह बाजार में बिकने वाली गैस की गोली भी परीक्षण में फेल मिली है।
दो साल के भीतर ऐसे 14 मामले पकड़ में आए हैं। 12 मामलों में मुकदमा दर्ज कराया गया गया है। सबसे चौंकाने वाला मामला मेडिकल कॉलेज का रहा है। यहां मरीजों को दी गई शुगर की दवा मानक पर खरी नहीं उतरी। दवा की दुकानों से लिए गए नमूने भी जांच में फेल हो गए हैं।
विज्ञापन
औषधि सुरक्षा विभाग ने संबंधित दवा कंपनी-वितरक के खिलाफ अदालत में केस दर्ज कराने के साथ संबंधित बैच की दवाएं मार्केट से हटाने का निर्देश दिया है। कुछ मामलों में जांच की जा रही है। हालांकि नमूनों की जांच प्रक्रिया पूरी होते-होते कम गुणवत्ता वाली दवाएं हजारों मरीजों तक पहुंच जा रही हैं, जिसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।