सोनभद्र। कभी बारिश तो कभी तेज धूप। उतार-चढ़ाव वाला यह मौसम कई बीमारियों का कारण बना हुआ है। ऐसे में खान-पान में तनिक लापरवाही डायरिया का भी शिकार बना रही है। जिले में डायरिया के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग उस पर नियंत्रण कर रहा है, तब तक नई जगह बीमारी शुरू होने से मुश्किलें बढ़ी हैं। डायरिया के लिए सबसे बड़ा कारण दूषित पेयजल और सफाई के अभाव को माना जा रहा है।
बरसात के बाद जलस्तर में सुधार होने से हैंडपंपों ने पानी देना शुरू किया तो टैंकर से आपूर्ति बंद हो गई। ऐसे में लोग पूरी तरह हैंडपंप, कुंआ व तालाब के पानी पर निर्भर रह गए हैं। बारिश के बाद मटमैला पानी बीमारी का कारण बन रहा है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अब तक सामने आए डायरिया के ज्यादातर मामलों में दूषित पेयजल अहम वजह है। इसके अलावा बरसात के बाद जगह-जगह जलभराव और सफाई के अभाव से भी डायरिया काे बढ़ावा मिल रहा है। इसका असर बीमारी के रूप में सामने दिख रहा है।
इन बड़े मामलाें से समझें डायरिया का कारण
एक सप्ताह पूर्व नगवां ब्लॉक के मकरीबारी गांव में 30 से अधिक लोग डायरिया से पीड़ित हुए। इसमें एक वृद्धा की जान भी चली गई। जांच में सामने आया कि गांव में पेयजल का उचित प्रबंध नहीं है। यहां बरिया टोला निवासी अधिकांश परिवार चुआंड़ के पानी पर आश्रित हैं। दूसरा मामला घोरावल विकास खंड के राजपुर गांव का है। वहां एक माह पूर्व हैंडपंप के दूषित जल के सेवन से 20 से अधिक लोग डायरिया प्रभावित मिले। चार दिन पूर्व चोपन ब्लाक के पटवध में डायरिया से एक मासूम की मौत और करीब 30 लोगों के डायरिया के चपेट में आने की प्रमुख वजह कुएं का दूषित पानी पीना रही। इसी तरह एक पखवारे पूर्व घोरावल के बिसरेखी गांव में 40 से अधिक लोग डायरिया पीड़ित मिले। दर्जन भर से अधिक को अस्पतालों में भर्ती भी कराना पड़ा था। यहां भी जांच में स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी का प्रमुख कारण शुद्ध पेयजल न मिलना बताया था।
बीमारी पर नियंत्रण के लिए गठित हुआ रैपिड रिस्पांस सेल
स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. सुमन जायसवाल ने बताया कि डायरिया पर नियंत्रण के लिए जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय रैपिड रिस्पांस सेल गठित किया गया है। जिले के किसी भी इलाके के बीमारी की सूचना पर उपचार संबंधित त्वरित कार्रवाई करती है। इसके साथ ही जिला स्तरीय एपिडेमिक कंट्राेल रूम भी बनाया है, जो समन्वय बनाकर कार्य करती है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर बीमारियां गंदा पानी पीने से हो रही हैं।
डायरिया बचाव :
- कुएं का पानी न पीएं।
- पानी उबालकर ही पीएं, इससे पानी में मौजूद कीटाणु खत्म हो जाएंगे।
- पानी को साफ करने के लिए उसमें क्लोरीन की गोली मिलाई जा सकती है।
- साफ व ताजा भोजन करें।
- हैंडपंपों के पास साफ-सफाई रखें।