अस्पताल के विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों को रविवार के दिन न तो नाश्ता मिलता है और न ही खाना। ऐसी परिस्थितियों में वो मरीज तो भूखे ही रह जाते हैं जो अकेले हैं, जबकि अन्य को अपने घर वालों के भोजन का इंतजार करना पड़ता है।
आश्चर्य तो यह है कि प्रसूताओं के साथ भी स्वास्थ्य महकमा ऐसे ही पेश आता है जिन्हें भरपूर पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। इसका खुलासा रविवार को जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों से बातचीत के बाद हुआ।
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी, जबकि जिला विकास अधिकारी के संज्ञान में जब यह प्रकरण लाया गया तो उन्होंने सवाल किया कि क्या संडे को मरीजों को भूख नहीं लगती।
जिला संयुक्त चिकित्सालय लोढ़ी में भर्ती मरीजों को सप्ताह में छह दिन तो खाना मिलता है, लेकिन रविवार को वे इससे वंचित रहते हैं। इस दिन सुबह उन्हें न तो नाश्ता मिलता है और न दिन या रात में खाना।
इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ती है। खासतौर पर जिन मरीजों के साथ कोई तीमारदार नहीं होता उन्हें दिन भर भूखे ही रहना पड़ता है।
रविवार को जब इस बारे में मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों से जानकारी ली गई तो पता चला कि इस दिन नाश्ता, खाना मरीजों को नहीं मिलता। इतना ही नहीं जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को भी भोजन नहीं दिया जाता, जबकि उन्हेें डिलीवरी के बाद पूरे पौष्टिक आहार की जरूरत होती है।
इस बारे में जब जिला संयुक्त चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. आरएन मिश्रा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसकी जांच कराई जाएगी।
यदि शासनादेश में संडे को बंदी नहीं होगा तो मरीजों को अब हर संडे खाना देने का इंतजाम किया जाएगा। सीडीओ महेंद्र सिंह की जानकारी में जब यह प्रकरण लाया गया तो उन्होंने आश्चर्य जताते हुए खुद यह सवाल किया कि आखिरकार क्या संडे के दिन मरीजों को भूख नहीं लगती।
उन्होंने कहा कि मरीजों को खाना न दिया जाना गंभीर मसला है। खासकर जननी सुरक्षा योजना के तहत भर्ती प्रसूताओं को भोजन न मिलना ठीक नहीं। डीएम के संज्ञान में लाकर इस मामले की जांच कराई जाएगी।