मेडिकल काॅलेज के अधीन आने के बाद भी जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतर गई हैं। मरीजों को पहले सैंपल और फिर रिपोर्ट लेने के लिए भटकना पड़ रहा है। मरीजों को एक दिन बाद रिपोर्ट मिल पा रही है। ऐसे में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल की ओपीडी के साथ ही इमरजेंसी मरीजों में 20 फीसदी तक इजाफा हुआ है। हालांकि स्टाफ की कमी और कई जांच मशीनें पुरानी होने के कारण मरीजों को परेशानी हो रही है। औसतन पूर्व में इस मौसम में डेढ़ सौ मरीजों के सापेक्ष इन दिनों दो सौ से ढाई सौ मरीजों के सैंपल लिए जा रहे हैं।
यह संख्या गर्मी में 25 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है। हालांकि अस्पताल में एक बार में दो मशीनों में सौ सैंपल ही लगते हैं। जांच संख्या के आधार पर डेढ़ से ढाई घंटे में जांच पूरी होती है। अस्पताल में ओपीडी के मरीजों के लिए सुबह आठ से 11 बजे तक ही सैंपल लेने की व्यवस्था है।
मेडिकल काॅलेज के अधीन आने के बावजूद जिला अस्पताल में मरीजों को खून की जांच की रिपोर्ट एक दिन में उपलब्ध कराने में महकमा फेल है। लैब का विस्तार न होने और मशीनों की क्षमता बढ़ाकर 24 घंटे जांच न होने के कारण ओपीडी के मरीजों एक दिन के बाद रिपोर्ट मिलती है।
सौ किमी दूर से आने तक बंद हो जाती है लैब
जिला अस्पताल के लैब में जांच के सैंपल 11 बजे तक ही लिए जाते हैं। जिला भौगोलिक रूप से चुनौती पूर्ण है। दुद्धी,अनपरा,कोन, बीजपुर,बभनी, खलियारी के इलाके से लोगों को 60 से सौ किमी का सफर कर आने में 11 बज जाते हैं। ऐसे में इन इलाकों के काफी मरीजों की जांच नहीं हो पाती है। ऐसे में मरीज जांच के लिए भटकते हैं। जो सक्षम हैं वो बाहर जांच कराते हैं। जो नहीं है वह परेशान होते हैं।
अस्पताल में इलाज कराने आने वाले सभी मरीजों के लिए जांच की सुविधा है। इससे गरीब मरीजों को फायदा मिल रहा है। अस्पताल में खून की जांच की रिपोर्ट एक दिन में उपलब्ध कराने के लिए लैब का विस्तार कराया जाएगा।
-डॉ. बी.सागर, सीएमएस।