क्षेत्र में बहने वाली पांडु नदी जो अपना अस्तित्व खोने के कगार पर पहुंच चुकी है। नदी का अधिकांश भाग कम बरसात होने के कारण लगभग सूख चुका है। भारत पुनरोत्थान अभियान के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को कचनरवा में बैठक कर श्रमदान के जरिए इसके जलधारा को जीवित करने का कदम उठाया है। नौ मई को पांडु नदी के उद्गम स्थल पांडुचट्टान से नदी के सफाई की शुरुआत की जाएगी। इस काम के लिए क्षेत्र के ग्राम प्रधान, बीडीसी के अलावा आम लोगों का समर्थन है।
चोपन ब्लॉक अध्यक्ष राममूर्ति गुप्ता ने बताया कि संस्था के राष्ट्रीय सदस्य एवं पूर्व एडीजीपी एसएन सिंह ने पांडु नदी के सफाई के लिए सिंचाई विभाग के आलाधिकारियों को पत्र लिखा था, परंतु विभाग की ओर से कोई कदम न उठाए जाने पर भारत पुनरोत्थान अभियान के कार्यकर्ताओं ने श्रमदान के जरिए नदी के सफाई का निर्णय लिया है। पांडु नदी इन दिनों घास, जलीय पौधों व सिल्ट से पट गई है। वर्तमान समय में नदी में नाम मात्र का ही जल प्रवाह रह गया है।
ऐसे में लोगों का मानना है कि एक बार सिल्ट की सफाई कर दिया जाय तो नदी की धारा पुन: जागृत हो सकती है। पांडु नदी इतिहास में कभी सूखी नही थी तथा लोक कथाओं के अनुसार इसे महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। श्रमदान कार्यक्रम जिला समन्वयक अमरनाथ देव पांडेय की देख-रेख में होगा। बैठक में कचनरवा प्रधान उदय यादव, कुड़वा प्रधान सुजीत यादव, किशुनपुरवा प्रधान प्रमोद जायसवाल, पिपरखाड़ के पूर्व प्रधान मुनेश्वर यादव, श्रवण जायसवाल, नारद मुनि आदि मौजूद रहे।