सोनभद्र। कोरोना महामारी की दूसरी लहर से निपटने के लिए जिला अस्पताल परिसर में बने एल-2 अस्पताल के साथ जिले के नौ निजी अस्पताल भी कोविड हॉस्पिटल में बदल दिए गए है। निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए अलग से वार्ड बनाए गए है। जिसमें 134 बेड है। वहीें कोरोना की रफ्तार कम होने से अधिकांश बेड खाली है। निजी हास्पिटलों में कोविड मरीजों के उपचार की अलग व्यवस्था होने से अन्य बीमारियों के मरीजों का भी इलाज हो रहा है। उधर, ऑक्सीजन की कमी दूर होते ही कई निजी अस्पताल में पथरी, हार्निया, मोतियाबिंद समेत अन्य बीमारियों के गंभीर मरीजों का आपरेशन होने लगा है।
कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए धनवंतरी हॉस्पिटल एनटीपीसी रिहंद, हिंडालको हॉस्पिटल रेनुकूट, संजीवनी चिकित्सालय एनटीपीसी शक्तिनगर, जीवन ज्योति मशीही अस्पताल रार्बटसगंज, कीर्तिपाली हॉस्पिटल रार्बटसगंज, सोनभद्र मल्टी स्पेसलिटी रार्बटसगंज, साईं हॉस्पिटल रार्बटसगंज, रेनुपावर हॉस्पिटल रेनुसागर, प्रभव सर्जिकल हॉस्पिटल उरमौरा को कोविड अस्पताल बनाया गया है। हर जगह नोडल अधिकारी लगाए गए हैं। इन अस्पतालों में कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के इलाज के लिए अलग-अलग वार्ड में 134 बेड हैं। प्रशासन जरूरत के अनुसार निजी अस्पतालों को ऑक्सीजन मुहैया करा रहा है। डीएम अभिषेक सिंह ने चिन्हित अस्पतालों के संचालकों को निर्देशित किया है कि वे अपने यहां आने वाले मरीजों को भर्ती करने से मना नहीं करेंगे तथा विशेष परिस्थिति में अन्य एल-2 चिकित्सालय में रेफर करने से पूर्व संबंधित अस्पताल में भर्ती के लिए बेेड की उपलब्धता की स्थिति पता कर लेगें।
ताकि रेफर करने के बाद मरीज को बेड के लिए भटकना न पड़े। चयनित निजी अस्पतालों में बुखार, सर्दी, जुकाम समेत अन्य बीमारियों से पीड़ितों का भी इलाज किया जा रहा है। फिर भी इन अस्पतालों में मरीज या तीमारदार जाने से बच रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं वे संक्रमण की चपेट में न आ जाए। वहीं ऑक्सीजन की कमी दूर होने से पूर्व की तरह जिन निजी अस्पतालों में पथरी, हार्निया, मोतियाबिंद समेत अन्य बीमारियों का ऑपरेशन होता था, वहां ऑपरेशन किया जा रहा है। इसलिए मरीजों को ऑपरेशन के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। पूर्व में ऑक्सीजन न मिलने के कारण ऑपरेशन नहीं हो रहा था।
सीएमओ नेम सिंह ने कहा कि जिला अस्पताल, सभी सीएचसी, पीएचसी और न्यू पीएचसी पर बुखार समेत अन्य रोगों से पीड़ित जो मरीज पहुंच रहे हैं। उनका उपचार हो रहा है। अगर किसी व्यक्ति को बुखार, जुकाम आदि समस्या होती है तो वे तत्काल अपने नजदीकी राजकीय अस्पतालों के चिकित्सकों के संपर्क कर दवाएं लें। सीएचसी म्योरपुर और पीएचसी मधुपुर को कोविड अस्पताल बनाया जा रहा है। ऑक्सीजन की कमी नहीं है। वहीं दूसरी ओर प्रभारी एल-2 अस्पताल के डॉ. राघवेंद्र सिंह का कहना है कि जिला अस्पताल परिसर में बने एल-2 अस्पताल में करीब 300 मरीजों को भर्ती कर उपचार की व्यवस्था है। लेकिन वर्तमान में 59 मरीज ही भर्ती हैं। वहीं 22 वेंटिलेटर युक्त आईसीयू बेड में से 10 बेड खाली हैं। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है।