देश में एचएमपीवी की दस्तक ने चिंता बढ़ा दी है। कई हिस्सों में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी गई है, मगर जिले में स्वास्थ्य महकमा वायरस से लड़ने के लिए अभी तैयार नहीं है। ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़े हैं तो वेंटिलेटर सहित अन्य जरूरी उपकरण धूल फांक रहे हैं।
कोरोना काल के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। संसाधनों का अभाव भी साफ नजर आया। बाद में सभी अस्पतालों में नए संसाधन दिए गए थे, मगर देखरेख न होने से ज्यादातर उपकरण बदहाली के शिकार हैं।
इस बीच देश में ह्यमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के बढ़ते मामलों ने लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इसमें कोरोना महामारी की तरह बुखार, खांसी-खरास और बार-बार छींक आने के लक्षण मिल रहे हैं। अगर जिले में भी इस बीमारी का प्रकोप बढ़ता है तो संसाधनों के रखरखाव में लापरवाही लोगों पर भारी पड़ सकती है।
जिले के अस्पतालों में लगे ज्यादातर ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़े हैं। जिला अस्पताल परिसर में ही अलग-अलग क्षमता के पांच प्लांट लगे हैं। इसमें एल-2 अस्पताल के पास 1500 और पांच सौ लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन देने वाले दो प्लांट हैं।
दो अन्य प्लांट जिला अस्पताल के मुख्य भवन के पास है। इनकी क्षमता भी 1500 लीटर और 45 लीटर प्रति मिनट है। एक मिनी प्लांट बर्न यूनिट के पास लगा था। इसके अतिरिक्त शाहगंज, मधुपुर और म्योरपुर सीएचसी और संयुक्त चिकित्सालय डिबुलगंज में भी प्लांट स्थापित किए थे।
मंगलवार को पड़ताल में सामने आया कि वर्तमान में कोई भी प्लांट चालू हालत में नहीं है। जिला अस्पताल में लगे 1500 लीटर क्षमता वाला प्लांट करीब दस माह से खराब है। इसके कुछ उपकरण चोर निकाल कर ले गए हैं तो बर्न यूनिट के पास स्थापित प्लांट के अधिकांश हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए।
एल-2 अस्पताल के पास लगे प्लांटों पर भी ताला लटक रहा है। कुछ ऐसी ही स्थिति जिले के अन्य अस्पतालों में स्थापित प्लांट की है। दूसरी ओर पूर्व में इन्हे चलाने के लिए नियुक्त कर्मी अब अन्यत्र चले गए हैं। ऐसे में लोगों की सांसों पर अगर संकट आया तो अचानक से ऑक्सीजन उपलब्ध न होने से समस्या हो सकती है।
अधिकांश अस्पतालों में पाइप लाइन की बजाय मरीजों को सिलिंडर से ऑक्सीजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे मरीजों को खामियाजा उठाना पड़ सकता है। जिला अस्पताल में प्लांट होने के बावजूद ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदा जा रहा है। तो अधिकांश मरीजाें को पाइन लाइन की बजाय ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से ऑक्सीजन मुहैया कराया जा रहा है।
जिले में 78571 लोगों पर एक वेंटिलेटर, फिर भी फांक रहे धूल
जिले में किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से समुचित प्रबंध नहीं है। मेडिकल काॅलेज के अधीन 22 वेंटिलेटर है, जबकि सीएचसी मधुपुर, शाहगंज, म्योरपुर में एक-एक और अन्य विभागीय अस्पतालों में दो वेंटिलेटर पड़े हुए हैं। इस तरह जिले के सरकारी अस्पतालों में कुल 28 वेंटिलेटर हैं। कोरोना काल के बाद से इनका कोई उपयोग नहीं हो सका है। मंगलवार को मेडिकल काॅलेज के एलटू अस्पताल में 20 वेंटिलेटर एक ही कमरे में बंद मिले, जो लंबे समय से यहां धूल फांक रहे हैं। इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।