सोनभद्र। निकायों में बनीं पेयजल टंकियों की सफाई में लापरवाही बरती जा रही है। आलम यह है कि एक-एक साल तक टंकियों की सफाई नहीं की जा रही है और लोग दूषित जल पीने के लिए विवश हो रहे हैं। हालांकि निकाय के अधिकारी छह-छह माह के अंतराल पर टंकियों की सफाई करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन मौके पर पड़ताल करने पर जमीनी हकीकत कुछ और ही सामने आया। बहरहाल टंकियों की सफाई के प्रति संबंधित निकाय के जिम्मेदारों को सतर्कता बरतने की जरूरत हैं, ताकि वाराणसी के सरकारी अस्पताल की पानी टंकी जैसी घटना यहां न होने पाए।
जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज नगर में नौ ओवरहेड टंकियों का निर्माण कराया गया है। चार टंकियां पेयजल योजना की है, जबकि पांच टंकियां नगर पालिका प्रशासन की हैं। इन्ही पांच टंकियों के जरिए अभी नगर में पानी की आपूर्ति की जा रही है। निकायों में बने पानी की टंकियों की साफ-सफाई समय-समय पर कराई जानी चाहिए। पेयजल टंकियों की अंदर से भले ही सफाई कराया जा रहा हो, मगर बाहर से देखने पर साफ-सफाई समय से होना प्रतीत नहीं हो रहा है। नगर स्थित अधिकांश टंकियों पर मधुमक्खियां छत्ता लगा हुआ है, टंकियों की रंगाई पुताई भी लंबे समय से नहीं हुई है। नगर पालिका के जलकल प्रभारी विमलेश कुमार की मानें तो नगर स्थित सभी पेयजल टंकियों में फिक्सवॉल लगा हुआ है, जिसे 10 से 12 दिन पर खोलकर सफाई कराई जाती है। सभी ओवरहेड टंकी ऊपर से बंद की गई हैं।
छह माह पर होती है टंकियों की सफाई
चोपन। नगर पंचायत चोपन में पेयजलपूर्ति के लिए चार ओवरहेड टंकियां बनी हैं। चोपन गांव, हाईडिल काॅलोनी, थाना के पास तथा गौरव नगर में बनीं इन टंकियों से नगर में जलापूर्ति होती है। नगर पंचायत के कर्मचारियों की मानें तो टंकियों की सफाई छह-छह माह पर मजदूरों से कराई जाती है। पाइप लीक होने की स्थिति में उसका तत्काल मरम्मत करा दिया जाता है।
नगर में पेयजल आपूर्ति के लिए बनी टंकियों की समय-समय पर सफाई कराई जाती है। पेयजल से जुड़ी समस्याओं का तत्काल निस्तारण कराया जाता है। यदि कहीं कोई समस्या है, तो उपभोक्ता बताएं उसका समाधान कराया जाएगा। - महेंद्र कुमार सिंह, ईओ, नगर पंचायत चोपन।