सोनभद्र। सोन संगीत फाउंडेशन के अध्यक्ष सुशील मिश्रा की तरफ से रॉबर्ट्सगंज स्थित रामनाथ शिवेन्द्र के आवास पर रविवार को भारत भारती काव्यार्चन हुआ।
सुधाकर पांडेय स्वदेश प्रेम ने वाणी वंदना की। प्रदुम्न त्रिपाठी ने - जीवन में मधुमास रहे, रिश्तों में विश्वास रहे, माता-पिता देवतुल्य, सदा प्रेम की प्यास रहे... सुनाया। अशोक तिवारी ने - एक चिराग बेहतर है सौ दीये जलाने से..., धर्मेश चौहान एडवोकेट ने - आ जाती है जब मेरे घर पर मेरी साली, तब लगता है जैसे हो सारी रात दिवाली... सुनाया। जै राम सोनी, दिलीप सिंह दीपक, दयानंद दयालू, सुनील चौचक ने भी रचनाएं सुनाईं।
कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने - सबसे न्यारा सबसे प्यारा मेरा यह वतन, यहां की धरती के आंचल में है अनमोल रतन.., प्रभात सिंह चंदेल ने - जय जगत जननी जनम भू वीर मातु वसुंधरा... सुनाया। नोटरी अधिवक्ता सोन साहित्य संगम के राकेश शरण मिश्र ने वीर शहीदों पर काव्यांजलि दी।
गीतकार ईश्वर विरागी ने - थाम लेंगे वक्त को चलने न देंगे... अजय चतुर्वेदी कक्का ने - अक्ल बड़ी या भैंस... सुनाया। विवेक चतुर्वेदी, दिवाकर दिवेदी मेघ ने रचनाएं सुनाई। अध्यक्षता कर रहे अजय शेखर ने हम अस्थियों से वज्र का निर्माण करते हैं... सुनाकर आयोजन को विराम दिया। शहीद स्थल ट्रस्ट करारी के संस्थापक प्रदुम्न त्रिपाठी के संयोजन में कार्यक्रम हुआ। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर व संचालन अशोक तिवारी ने किया। सभी कवियों एवं अतिथियों का अंगवस्त्र से अभिनंदन किया गया। आभार सुशील मिश्रा ने व्यक्त किया।