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Sonebhadra News: महाकुंभ के लिए हर रोज गुजरे डेढ़ हजार अतिरिक्त वाहन

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सोनभद्र। प्रयागराज महाकुंभ मेले का असर सोनभद्र की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। मेले में जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ से टोलवेज को लाखों का मुनाफा हुआ है। महज 20 दिनों में ही जिले में स्थित दो टोल बूथों पर करीब 30 लाख से अधिक की कमाई हुई है। हर रोज इन बूथों से 1200-1500 अतिरिक्त वाहन गुजरे हैं। इसमें छोटे वाहनों की संख्या अधिक रही।
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छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बंगाल सहित अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रयागराज तक आने-जाने के लिए सोनभद्र का रास्ता सुगम रहा है। पौष पूर्णिमा से महाकुंभ की शुरुआत के साथ ही इन राज्यों के श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, लेकिन 26 जनवरी के बाद इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी और माघी पूर्णिमा के अमृत स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु इस रास्ते से गुजरे हैं। उनके वाहनों की आवाजाही से वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर जिले की सीमा में स्थापित लोढ़ी और मालोघाट टोल बूथ की कमाई में इजाफा हुआ है। एसीपी टोलवेज के आंकड़ों के अनुसार, औसतन 1200-1500 अतिरिक्त वाहन हर रोज गुजरे हैं। इनमें कार, जीप, वैन जैसे वाहन अधिक रहे। ऐसे वाहनों का एक तरफ का टोल लोढ़ी बूथ पर 150 रुपये है। बस का रेट 430 रुपये तक है। मालोघाट में एक तरफ का टोल कार-जीप जैसे वाहनों के लिए 30 रुपये है। वाहनों की आवाजाही के लिहाज से टोल बूथों पर 30 लाख से अधिक की कमाई हुई है। इस मार्ग पर अहरौरा व नरायनपुर में भी टोल बूथ है। हालांकि ज्यादातर छोटे वाहन हिंदुआरी से ही मिर्जापुर की तरफ निकलते रहे।
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होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट का भी बढ़ा कारोबार
मिर्जापुर, प्रयागराज में होटल, ढाबों पर खान-पान की सामग्री की कमी के कारण लोगों ने सोनभद्र आकर भूख-प्यास मिटाई। इसका लाभ हाईवे के किनारे स्थित ढाबाें, रेस्टोरेंट संचालकों को मिला है। इनकी आमदनी में भी डेढ़ से दो गुनी वृद्धि हुई है। उन ढाबों को विशेष लाभ मिला, जहां शाकाहार की व्यवस्था थी।
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वर्जन...
महाकुंभ के कारण इस मार्ग पर वाहनों की संख्या में वृद्धि हुई है। सबसे ज्यादा ट्रैफिक मौनी अमावस्या से माघी पूर्णिमा के बीच रहा। हर रोज औसतन 1200-1500 अतिरिक्त वाहन गुजरे हैं। इनमें छोटे वाहनों की संख्या अधिक रही। इससे अतिरिक्त कमाई भी हुई है। -नीरज कुमार, वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक, एसीपी टोलवेज।
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