जिले को मलेरिया व डेंगू मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ अब गोदरेज एंबेड परियोजना आगे आई है। संस्था जिले के पांच ब्लॉकों के अति संवेदनशील सौ गांवों में मच्छरजनित बीमारियों को जड़ से खत्म करने के लिए कार्य करेगी। यह संस्था फिलहाल लखनऊ और कानपुर जैसे बड़े शहरों में डेंगू के नियंत्रण के लिए काम कर रही है।
अति पिछड़ा जिला होने के साथ ही भौगोलिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण जनपद में मलेरिया-डेंगू व अन्य मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप रहा है। इसकी चपेट में आकर हर साल कई मौतें होती हैं। इसमें कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग जुटा है। इस अभियान में सहयोग के लिए अब गोदरेज की एंबेड (एलिमिनेशन ऑफ मास्किटो बॉर्न इंडेमिक डिजिज) आगे आई है।
संस्था मलेरिया मुक्त जिला बनाने के लिए जिले में विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन करेगी। इसके लिए संस्था की ओर से जिले के पांच ब्लॉकों से कुल सौ अतिसंवेदनशील गांवों को चयनित किया गया है। वहां सर्वे का कार्य शुरू कर दिया गया है। संस्था के सदस्य साल में चार बार हर घर तक पहुंचेंगे और लोगों को मलेरिया से होने वाले खतरे से आगाह करते हुए बचाव के लिए प्रशिक्षित करेंगे।
मलेरिया खत्म होने के लिए माइक्रो प्लान तैयार कर जागरुकता कार्यक्रम शुरू होगा। हर दस गांव पर एक बीसीसीएफ तैनात किए गए हैं। मॉनिटरिंग के लिए जिला समन्वयक की तैनाती की गई है। ये गांवों में घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। उन्हें तमाम कार्यक्रमों, विजुअल, ऑडियो पोस्टर से जागरूक करेंगे।
आशाओं व क्लीनिक संचालक होंगे जागरूक
सभी चयनित सौ गांवों की आशाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे पहले से मिले किट का उपयोग कर लोगों के खून की जांच करें। गांवों के विभिन्न इलाकों में संचालित क्लीनिक के संचालकों को भी प्रशिक्षित कर उनसे ब्लड की जांच कराने व अपने यहां आने वाले मरीजों को बेहतर उपचार के लिए राजकीय अस्पताल में भेजने की अपील होगी। 18 से 24 वर्ष के युवाओं को इस कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा, जो गांव में बीमार लोगों की सूचना देंगे।
स्कूलों में भी चलेगा अभियान
फैमिली हेल्थ ऑफ इंडिया की ओर से मलेरिया व डेंगू की रोकथाम के लिए स्कूलों में विविध कार्यक्रम होंगे। जहां बच्चों के साथ ही शिक्षकों व अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा। इस दौरान घरों की कुछ संख्या को मिलाकर क्लस्टर तैयार किया जाएगा। हर घर पर चिह्न भी बनेगा। जहां गेम कार्ड, बैनर, बुकलेट, फ्लिप बोर्ड, विभिन्न मॉडल्स के इस्तेमाल से जागरूक किया जाएगा। हर घर का डेटा पोर्टल पर अपलोड होगा। वहीं चयनित गांवों में कार्यक्रम तीन साल तक संचालित होगा। जरूरत के अनुसार गावों की संख्या भी बढ़ेगी।
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत गोदरेज की ओर से संचालित एंबेड परियोजना के माध्यम से जिले में मलेरिया व डेंगू नियंत्रण के लिए विभिन्न कार्य होंगे। स्वजास्थ्य विभाग व एम्बेड के संयुक्त प्रयास से आने वाले समय में मच्छर जनित बीमारियों पर और अधिक नियंत्रण होगा। - धर्मेंद्र कुमार श्रीवास्तव, जिला मलेरिया अधिकारी।
पांच ब्लॉकों के कुल सौ गांवों का चयन कर सर्वे किया जा रहा है। सोनभद्र को मलेरिया व डेंगू मुक्त बनाने की दिशा में कार्य होगा। घरों में जमा पानी को खाली करने, हांडी मटकी को पलटकर रखने, बुखार आने पर 24 घंटे के अंदर मलेरिया की जांच करवाने, मलेरिया धनात्मक आने पर पूरा इलाज कराने का संकल्प दिलाया जाएगा। - शशांक यादव, जिला समन्वयक, एंबेड परियोजना।