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सावन का आखिरी सोमवार पर हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंजा सोनांचल

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राबर्ट्सगंज वीरेश्वर महादेव मंदिर में पुजन अर्चन करते लोग। - फोटो : SONBHADRA
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श्रावण मास के आखिरी सोमवार को गुप्तकाशी के शिवद्वार में विराजमान उमामाहेश्वर सहित अन्य सुप्रसिद्ध शिवालयों में जलाभिषेक करने के लिए कांवरियों व श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। बोल बम, बोल बम के जयकारे से समूचा सोनांचल गुंजायमान हो उठा। मंदिरों में भोर में मंगल आरती के साथ कपाट खोल दिया गया। पूरे दिन शिवालयों में दर्शन पूजन एवं जलाभिषेक का क्रम चलता रहा। आखिरी सोमवार होने के नाते मंदिरों में अनुष्ठान भी होते रहे। शिवदार में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पीएसी के साथ घोरावल एसडीएम श्याम प्रताप सिंह, सीओ और कोतवाल डटे रहे।
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जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज के सिविल लाइंस स्थित वीरेश्वर महादेव मंदिर, सोमनाथ मंदिर, नगर से सटे बरैला शिवमंदिर एवं रौप पहाड़ी स्थित पंचमुखी महादेव मंदिर में सुबह से दर्शन पूजन के लिए भक्तों की भीड़ पहुंची। मन्नत के अनुसार भक्तगण कथा सुनने एवं रुद्राभिषेक कराने पहुंचे। भक्तों की भीड़ की वजह से मेला जैसा नजारा रहा। वहीं घोरावल ब्लॉक के शिवद्वार स्थित उमामाहेश्वर मंदिर में सावन के आखिरी सोमवार को दर्शन पूजन व जलाभिषेक के लिए कांवरियों के साथ आम दर्शनार्थियों की भीड़ भोर से ही लाइन में लग गई थी। आखिरी सोमवार को धाम में करीब 70 हजार से अधिक भक्तों ने दर्शन पूजन किया। करीब 5000 डाक बम कांवरियों ने जलाभिषेक किया। मुख्य पुजारी सुरेश गिरी, शिवराज गिरी, अजय गिरी, सतीश गिरी द्वारा भगवान भोले शिवशंकर व माता पार्वती की मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट खुल गए और सबसे पहले डाक बम के आने के साथ जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हुआ। रविवार की रात में भजन गायक गोविंद गोपाल के भक्ति गीतों पर कांवरिये झूमते रहे। उपजिला अधिकारी घोरावल श्याम प्रताप सिंह व पुलिस क्षेत्राधिकारी संजीव कटियार, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक गोपाल, शिवद्वार चौकी प्रभारी आशीष पटेल एवं आधा दर्जन से अधिक थानों की पुलिस, पीएसी, यातायात पुलिस, महिला पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में जुटी रही।
बभनी: श्री हरिशंकर मंदिर असनहर, बुढ़वा मंदिर चीकूटोला, शिव मंदिर बभनी में दर्शन पूजन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। सेवाकुंज आश्रम कारीडांड चपकी में सुबह साढ़े छह बजे से ही रूद्राभिषेक होना शुरू हुआ जो 11 बजे तक चला। इसमें मुख्य रूप से प्रांत सह संगठन मंत्री आनंदजी, कृष्ण गोपाल, यजमान के रूप में अश्विन त्रिपाठी, बृजेश पांडेय आदि रहे। कोन: लगातार दूसरे वर्ष घघिया खरौंधी से सैकड़ों की संख्या मे कांवरियों का जत्था बाजे गाजे के साथ रविवार की शाम विरेंद्र गुप्ता के अगुवाई में कोन होते पांडू नदी के उद्गम स्थल पांडु चट्टान पहुंचा जहां जल लेकर सुबह होते कोन शिवमंदिर व घघिया नवनिर्मित शिवमंदिर पर जलाभिषेक किया। बीजपुर क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध शिवालयों में भी सुबह से दर्शन पूजन के लिए भक्तों की भीड़ जुटी रही।
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लगातार 37वें वर्ष वीरेंद्र ने किया जलाभिषेक
घोरावल। शिवद्वार धाम में वर्ष 1986 से कांवर यात्रा प्रारंभ हुई। इसमें दर्जन भर कांवरियों ने मिर्जापुर स्थित गंगा जी से कांवर में जल लेकर 70 किलोमीटर तक पैदल चलकर शिवद्वार उमामाहेश्वर का जलाभिषेक किया। इन शुरुआती कांवरियों में शामिल घोरावल नगर के वीरेंद्र गुप्ता वर्ष 1986 से लगातार कांवर लेकर जलाभिषेक कर रहे हैं। सोमवार सुबह वीरेंद्र गुप्ता के मंदिर परिसर में पहुंचते ही हर हर महादेव के नारे के साथ स्थानीय लोगों ने स्वागत किया।
जलाभिषेक व रूद्राभिषेक के लिए उमड़े भक्त
श्रावण माह के अंतिम व चौथे सोमवार कोइलाके के शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रात: काल से शुरू जलाभिषेक व रूद्राभिषेक का कार्यक्रम पूरे दिन चला। शक्तिनगर के शक्तेश्वर मंदिर व कौहरौलिया स्थित प्राचीन शिवालय में दर्शन पूजन व जल चढ़ाने के लिए लंबी कतार लगी।
अल सुबह भक्त हर-हर महादेव, जय भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए शिवालयों में पंहुचे। इसके उपरांत कर विधि-विधान से जलाभिषेक के साथ रुद्राभिषेक किया। पूजा-अर्चना करते हुए भक्तों ने सुख समृद्धि की कामना किया। कोहरौलिया स्थित प्राचीन शिव मंदिर प्रांगण में प्रात: काल से ही भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक एंव रुद्राभिषेक करते हुए पूजा अर्चना किया। कोहरौलिया प्रधान प्रतिनिधि चंदन कुमार द्वारा मंदिर प्रांगण में 12 घंटे का हरे राम- हरे कृष्ण हिरिकीर्तन पाठ के साथ भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें आस पास ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सुबह से देर शाम तक भक्तों का आना जाना लगा रहा। इसी क्रम में सीएचपी शिव मंदिर, बीना कालोनी शिव मंदिर, मुख्य द्वार शिव मंदिर, चंदुआर मोहन ब्रह्म बाबा पहाड़ी शिव मंदिर सहित क्षेत्र के सभी शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी श्रद्धालुओं ने श्रद्धा से दर्शन पूजन के साथ जलाभिषेक किया।
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