बोल बम का नारा है, बाबा एक सहारा है का जयकारा लगाते हुए सुप्रसिद्ध विजयगढ़ दुर्ग स्थित रामसरोवर और मिर्जापुर के गंगा नदी से कांवरिया जल लेकर गुप्तकाशी पहुंचे।
यहां उमा-माहेश्वर की प्रतिमा पर जलाभिषेक कर मन्नते मांगीं। सावन के दूसरे सोमवार को श्रद्धालुओं का भोर से ही शिव मंदिरों में पूजन-अर्चन के लिए तांता लगा रहा।
वहीं बिजली विभाग के अधिकारियों की ओर से शिवद्वार मंदिर और घोरावल से शिवद्वार जाने वाले संपर्क मार्ग पर रोशनी का प्रबंध नहीं किए जाने से मार्ग पर अंधेरा की वजह से कांवरियों को जीव-जंतुओं का भय बना रहा।
सुप्रसिद्ध शिवद्वार स्थित उमा-माहेश्वर पूजन-अर्चन करने के लिए प्रदेश के अलावा बिहार, झारखंड, एमपी और छत्तीसगढ़ प्रांत से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
शनिवार को विजयगढ़ दुर्ग स्थित राम सरोवर और मिर्जापुर के गंगा नदी से कांवरिया जल लेकर गुप्तकाशी के लिए रवाना हुए। रविवार की शाम कांवरियों का जत्था शिवद्वार पहुंचने लगा।
अर्धरात्रि के बाद मंदिर का कपाट खुले तो कांवरियों ने जलाभिषेक शुरू किया। वहीं शिवद्वार में ठहराव और रोशनी की व्यवस्था न होने से कांवरियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पूरी रात बिजली नदारद रही। हालांकि मंदिर प्रबंधन की ओर से जेनरेटर से मंदिर परिसर और आसपास रोशनी की व्यवस्था की गई थी।
घोरावल से शिवद्वार तक जाने वाले मार्ग पर अंधेरा होने से कांवरियों को सर्प और बिच्छू के काटने का भय बना रहा। शिवद्वार में शौचालय न होने से सबसे अधिक महिला कांवरियों को दिक्कतें हुईं।
जबकि शिवद्वार एक सुलभ कांप्लेक्स है, लेकिन पानी के अभाव में बंद है। वहीं मुक्खा मोड़ से पेढ़ नहर तक संपर्क मार्ग पर बिखरी गिट्टियां कांवरिया का इम्तिहान लेती रहीं।
शिवद्वार में रात भर सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर फोर्स के साथ एसडीएम कैलाश सिंह, एएसपी शंभूशरण, सीओ सच्चिदानंद, घोरावल कोतवाल रमाकांत पांडेय डटे रहे।
पुलिस प्रशासन के कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में कतारबद्ध होकर भक्तों ने पूजन-अर्चन किया। इसी प्रकार से गोठानी, गोरारी शिव मंदिर, कंडाकोट के अलावां राबर्ट्सगंज नगर स्थित वीरेश्वर महादेव मंदिर, पंचमुखी, बरैला, गौरीशंकर, सोमनाथ मंदिर, दंडइत बाबा मंदिर, बरकरा स्थित बुढ़उ महादेव मंदिर, बभनी स्थित बूढ़ा देव मंदिर में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।