केंद्रों की जांच के लिए गत 13 मार्च को पहुंची सुपरवाइजर से शिकायत की गई तो ग्रामीणों को ही धमकी दी जाने लगी। बीडीओ के यहां प्रधान सरफराज के साथ पहुंचे ग्रामीणों का कहना था कि जब सुपरवाइजर से शिकायत की गई तो उन्होंने ग्रामीणों को धमकी तो दी ही, प्रधान ने एतराज किया तो उन्हें भी भला-बुरा सुनाया।
वितरण रजिस्टर से छेड़छाड़ किए जाने का भी आरोप लगाया गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एडीओ पंचायत सुनील कुमार, एडीओ एसटी राकेश कुमार मौर्य और सीडीपीओ महेंद्र कुमार की टीम गठित कर जांच के लिए भेजा गया।
बताते हैं कि इसके क्रम में दो दिन पूर्व जांच के लिए टीम पहुंची तो उन्हें ग्रामीणों की नाराजगी का सामना तो करना ही पड़ा। प्रकरण को लेकर ग्रामीण इस कदर नाराज थे कि टीम के पहुंचते ही हंगामे जैसी स्थिति बन गई। ज्यादातर ग्रामीणों ने पोषाहार वितरण में गड़बड़ी और बच्चों का निवाला डकारने का आरोप लगाया। वितरण के किए जा रहे दावे पर भी कई सवाल उठाए गए।
हालात कुछ इस कदर बन गए कि चार घंटे तक हंगामे जैसी स्थिति बनी रही और जांच के लिए पहुंचे अधिकारी वहां से निकलने के लिए मामले को शांत होने का इंतजार करते रहे। किसी तरह आक्रोश जता रहे ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया गया और मामले में कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया गया। तब जाकर अफसर वहां से निकल पाए। हालांकि अभी इस मामले में रिपोर्ट बीडीओ तक नहीं पहुंच पाई है।
रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जो भी स्थिति सामने आएगी, उसके आधार पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। - जितेंद्र नाथ दूबे, बीडीओ कोन
तीन माह के पोषाहार वितरण में गड़बड़ी बरती गई है। कई बार उन्होंने संबंधितों को समझाया। एतराज भी जताया गया लेकिन उल्टे उनके अधिकार पर ही सवाल उठाए जाने लगे। बच्चों के लिए आए पोषाहार को दुकान पर बेचने की भी जानकारी मिली है। जल्द ही इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचने के लिए बाध्य होंगे। - सरफराज अली, प्रधान खेमपुर